विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव जीती येदियुरप्पा की सरकार, चौथी बार येदियुरप्पा बने कर्नाटक के मुख्यमंत्री

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लम्बे समय से कर्नाटक में चल रहे सियासी ड्रामे का अंत हो गया है और विधान सभा में विश्वास मत हासिल कर येदियुरप्पा ने कर्नाटक में एक बार फिर अपनी सरकार बना ली है | वैसे तो बीते 26 जुलाई को ही राज्यपाल की अनुमति से येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और बहुमत पेश करने के लिए उन्हें राज्यपाल द्वारा 30 जुलाई तक का समय दिया गया था |

हालाँकि विधान सभा में विश्वास मत हासिल करना इतना आसन भी नहीं था | सदन के दौरान कई बार भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई | सदन के दौरान येदियुरप्पा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा की- ‘मैंने राज्य की ओर से पीएम किसान योजना के तहत लाभार्थियों को 2000 रुपये की 2 किस्तें देने का फैसला किया है | मैं विपक्ष से ये भी आग्रह करता हूँ राज्य की भलाई के लिए हम सबको मिलकर काम करना चाहिए | मैं सदन से अपील करता हूं कि वे मुझ पर एकमत से विश्वास व्यक्त करें |’

येदियुरप्पा की सरकार के विश्वास मत पर जीत हासिल करने के बाद सिद्धारमैया ने सरकार को शुभकामनाएं दी और कहा की येदियुरप्पा की सरकार जिन परिस्थितियों में बनी मैं उनके बारे में बोल सकता हूँ पर मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा | मैं सदन के इस आश्वासन का स्वागत करता हूँ और आशा करता हूँ की येदियुरप्पा की सरकार राज्य के लोगों के हित में काम करेगी |

बता दे की जेडीएस के जिन 14 बागी नेताओं पर विधान सभा के अध्यक्ष ने फैसला नहीं लिया था, बीते रविवार को अध्यक्ष ने दल बदल कानून के तहत इन पर फैसला लेते हुए इन 14 विधयाकों को अयोग्य करार दे दिया है | इससे पहले भी विधान सभा अध्यक्ष ने 3 विधायकों को अयोग्य करार दिया था | इसका मतलब है की अब ये 17 विधायक, 2023 में विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने तक विधानसभा का उपचुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे | हालाँकि अगर 2023 से पहले विधान सभा किसी परिस्थति में भंग हो जाता है तो ये फिर से विधायक बन सकते हैं |

वैसे तो येदियुरप्पा की सरकार ने विश्वास मत जीत लिया है और कर्नाटक में भाजपा की सरकार भी बना ली है पर अभी भी उनके सामने एक चुनौती है और वो है विधानसभा का उपचुनाव | अगर विधान सभा के उपचुनाव होते है तो इस परिस्थिति में येदियुरप्पा को अपना बहुमत कायम रखने के लिए खली हुए इन 17 सीटों में कम से कम आधे पर अपनी जीत दर्ज करनी होगी तभी उनकी सरकार सुरक्षित रहेगी |

अब जब येदियुरप्पा की सरकार सत्ता में है तो अपने अधिकारिक पॉवर का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार को उनका पद छोड़ने के लिए कह दिया है और अगर सोमवार को यानि की आज रमेश कुमार अपना इस्तीफा नहीं देते है तो येदुरप्पा की सरकार उनपर कारवाई भी कर सकते है |