करोड़ो रूपये खर्च के बाद भी यमुना मैली की मैली! 

छठ पूजा के बाबत दिल्ली में यमुना नदी की जो तस्वीरें सामने आई, उसने पूरे देश की फिक्र बढ़ा दी है क्योंकि यमुना में आज जो सफेद “जहर” बहता दिखा, वो आपके लिए, आपके परिवार के लिए और आपकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद खतरनाक है। बर्फ सा दिख रहा जहरीला झाग सामने आने के बाद एक बार फिर सबके मन में सवाल उठा है कि आखिर राज्य सरकार क्या कर रही है? ये तस्वीरें दिल्ली में यमुना की दुर्गति की हैं। सवाल ये है कि आखिर यमुना का ये हाल है क्यों और इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?

जहरीली यमुना में लोगों ने इस बार भी की छठ पूजा

यूं तो दिल्ली विधानसभा चुनाव में यमुना को साफ करने को लेकर बड़े बड़े दावे किये जाते है। लेकिन सत्ता में आने के बाद यही दावे कहा गुम हो जाते है पता ही नही चलता है। साल में एक छठ पर्व ही है जब यमुना की सुध मीडिया को आती है और सरकार की हकीकत सामने आती है कि वो यमुना को लेकर कितनी जागरूक है। लेकिन इस बार यमुना को देखने के बाद साफ पता चलता है कि यमुना पर सिर्फ सियासत ही होती है और कुछ नहीं,जहरीली हवा के साथ-साथ दिल्ली के लोग जहरीले पानी में जीने को भी मजबूर हैं। यमुना का पानी टॉक्सिक फोम से जहरीला हो चुका है और महापर्व छठ पर श्रद्धालु यमुना के इसी जहरीले झाग वाले गंदे पानी में पूजा करने को मजबूर हैं। आखिर यमुना की सफाई को लेकर दावे और वादे कब पूरे होंगे और कब यमुना एक बार फिर स्वच्छ और निर्मल दिखाई देगी। दिल्ली के लिए यमुना का साफ होना इसलिए भी बेहद जरूरी है, क्योंकि दिल्ली में पीने के पानी की सप्लाई यमुना से ही होती है, लेकिन इसके बावजूद यमुना को सबसे ज्यादा प्रदूषित दिल्ली ही करती है।

दिल्ली में यमुना का सिर्फ 2 फीसदी हिस्सा लेकिन प्रदूषण 76 फीसदी

जिस यमुना नदी का पानी दिल्ली में दाखिल होते वक्त साफ होता है, वो दिल्ली में घुसने के बाद मैली और जहरीली होने लगती है। दोनों जगह का फर्क साफ-साफ देखा जा सकता है कि चंद किलोमीटर बहने के बाद दिल्ली में यमुना नदी नाले में तब्दील हो जाती है। दिल्ली के सैकड़ों छोटे नाले 38 बड़े नालों में मिलते हैं और इन 38 बड़े नालों का पानी यमुना में गिरता है। इस पानी को साफ करने के लिए सभी नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। यही वजह है कि सभी नालों का प्रदूषित पानी यमुना नदी में गिरकर उसे जहरीला बना रहा है। इसी साल जनवरी में दिल्ली सरकार ने एनजीटी कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में बताया था कि दिल्ली में करीब 40 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चल रहे हैं और जहरीले झाग से निजात पाने के लिए इन्हें अपग्रेड करने की जरूरत है। इसमें कम से कम दिल्ली सरकार को 3 से 5 साल का समय लगेगा। लेकिन क्या ऐसा हो पाएगा, क्योंकि दशकों से दिल्ली में यमुना प्रदूषण का दंश झेल रही है। कई सरकारें आईं, कई वादे किए करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन यमुना की तस्वीर बदल नहीं पाई है।

हद तो तब हो गई जब दिल्ली सरकार ने यमुना में बह रहे झाग को खत्म करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया। ऐसा लगता है कि कही न कही सरकार मान चुकी है कि वो यमुना की सफाई में फेल हो चुकी है और इसलिए इस तरह के काम करके दिल्लीवालों को सिर्फ धोखा देने का काम कर रही है। ऐसे में दिल्ली पूछ रही है कि यमुना माता कब निर्मल और अविरल हो पायेंगी।