कोरोना को लेकर एकजुट होकर शोध मे लगी दुनिया

COVID-19 महामारी से अब तक दुनियाभर में करीब दो लाख लोग मारे गए है और 28 लाख से ज्‍यादा लोग इससे संक्रमित हैं। इस वैश्विक महामारी से जंग को तेज करने के लिए शुक्रवार को विश्‍वभर के नेताओं ने कोविड-19 के टेस्‍ट, दवाओं और वैक्‍सीन के काम में तेजी लाने का प्रण किया। इस वैश्विक रणनीति में उस समय फूट दिखाई दी जब अमेरिका ने विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के इस अभियान में हिस्‍सा नहीं लिया। हालांकि अमेरिका ने कहा है कि वह इस जंग में पूरी दुनिया के साथ खड़ा है।

फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रान, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और दक्षिण अफ्रीका के राष्‍ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत नेताओं ने वीडियो कान्‍फ्रेंस के जरिए डब्‍ल्‍यूएचओ के इस कार्यक्रम में हिस्‍सा लिया। इस बैठक का उद्देश्‍य कोरोना के खिलाफ सुरक्षित और प्रभावी दवा, टेस्‍ट और वैक्‍सीन बनाना है ताकि इस महामारी को रोका जा सके और कोविड-19 से फेफड़े को होने वाली बीमारी को ठीक किया जा सके।

हम एक साझा दुश्‍मन का सामना कर रहे

डब्‍ल्‍यूएचओ के महानिदेशक टड्रोस अधनोम ने कहा, ‘हम एक साझा दुश्‍मन का सामना कर रहे हैं जिसे एक साझा रणनीति के जरिए ही मात दी जा सकती है। अनुभव बताता है कि जब तरीके मौजूद होते हैं तो वे सभी के लिए एक समान तरीके से मौजूद नहीं होते हैं। हम इसे नहीं होने देंगे।’

US, चीन, भारत और रूस ने हिस्‍सा नहीं लिया

इस बैठक में एशिया, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों ने हिस्‍सा लिया लेकिन कई बड़े देशों जैसे चीन, भारत और रूस ने इसमें हिस्‍सा नहीं लिया। इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि वह इस बैठक में हिस्‍सा नहीं लेगा। इससे पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने डब्‍ल्‍यूएचओ के ‘चीन केंद्रित’ होने का आरोप लगाया था और इस वैश्विक संस्‍था के फंड को रोक दिया है।

कोरोना के खिलाफ जंग में दुनियाभर में 100 से ज्‍यादा वैक्‍सीन पर काम चल रहा है। इनमें से 6 टीकों को इंसानों पर परीक्षण करने की अनुमति दी गई है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों के एक समूह ने कोरोना वायरस का एक टीका विकसित किया है। मानव पर परीक्षण किये जाने के चरण में यह टीका सबसे पहले एक सूक्ष्मजीव विज्ञानी को लगाया गया है। इस महत्वपूर्ण परीक्षण के लिए शुरूआती दौर में शामिल किए गए 800 लोगों में सूक्ष्मजीव विज्ञानी एलिसा ग्रांताओ पहली स्वयंसेवी है।

एलिसा को उम्मीद है कि इस चिकित्सीय परीक्षण से दुनिया को जानलेवा कोरोना वायरस का एक टीका मिल जाएगा और लॉकडाउन हटाने में भी मदद मिलेगी। ग्रांताओ ने बीबीसी से कहा, ‘मैं एक वैज्ञानिक हूं, इसलिए मैं वैज्ञानिक प्रक्रिया में मदद करना चाहती हूं, जहां तक मैं कर सकती हूं।’ इस हफ्ते टीके का परीक्षण शुरू होने पर उन्हें ऑक्सफोर्ड में यह टीका लगाया गया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि मैंने वायरस का अध्ययन नहीं किया है इस वजह से मुझे आजकल बहुत बेकार सा महसूस हो रहा था। इसलिए मुझे लगा कि इस उद्देश्य के लिए मदद करने का मेरे पास यही सबसे आसान तरीका है। ’ उन्हें उनके 32 वें जन्म दिन पर यह टीका लगाया गया।