विश्व शौचालय दिवस : पीएम मोदी ने किया गाँधी जी के सपने को साकार

विश्व शौचालय दिवस 19 नवंबर को मनाया जाने वाला वार्षिक कार्यक्रम है। यह दिवस पर्याप्त स्वच्छता के महत्व पर बल देता है और सभी के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालयों की पहुंच की सिफ़ारिश करता है। मूलरूप से 2001 में विश्व शौचालय संगठन द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी। यह दिवस अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए मनाया जाता है।

विश्व शौचालय संगठन एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है, जो दुनिया भर में स्वच्छता और शौचालय की स्थिति में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन की शुरुआत 2001 में 15 सदस्यों के साथ हुई थी। अब इसकी संख्या 53 देशों से बढ़कर 151 हो गई है। संगठन के सभी सदस्य शौचालय की समस्या को खत्म करने और दुनिया भर में स्वच्छता के समाधान के लिए काम करते हैं। इसके अलावा विश्व शौचालय संगठन विश्व शौचालय सम्मेलन का आयोजक है और इसी संगठन ने संयुक्त राष्ट्र की तरफ से विश्व शौचालय दिवस की शुरुआत की है।

यह संगठन सिंगापुर में 19 नवंबर 2001 को जैक सिम द्वारा स्थापित किया गया था। जैक सिम, विश्व शौचालय संगठन के संस्थापक, के शब्दों में – “जिसके बारे में हम चर्चा नहीं कर सकते उसका हम सुधार नहीं कर सकते”। विश्व शौचालय दिवस स्वच्छता के महत्व पर जागरूकता फैलाने का एक बहुमूल्य अवसर प्रदान करता है और हर जगह को सुधारने तथा हर साल वहां की उचित स्वच्छता को बनाए रखने के उद्देश्य की गति को प्रोत्साहित करता है। यह दिवस इस बात को सुनिश्चित करता है कि सभी की सुरक्षित शौचालय और स्वच्छता तक पहुंच होनी चाहिए।

भारत में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू करते हुए खुद हाथों में झाड़ू थामी थी तो पूरे देश ने इस अभियान को एक जन आंदोलन बना दिया। आज 699 जिले, 5.99 लाख गांव, 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं। भारत में ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 2019 में 100 फीसदी हो गया है, जो 2014 में महज सिर्फ 39 फीसदी था। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन शहरी के अंतर्गत 60.36 लाख शौचालयों बनाए जा चुके हैं और 4,320 खुले में शौच से मुक्त शहर हो चुके हैं। मोदी सरकार ने 2014 से देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए करीब 10.50 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने खुद मिसाल पेश करते हुए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के शहंशाहपुर गांव में अपने हाथों से पहली बार शौचालय की नींव रखी। प्रधानमंत्री के इस अभियान को देश में एक से बढ़कर एक लोगो का सहयोग भी मिला। सरकारी अधिकारियों से लेकर, सीमा की रक्षा में जुटे वीर जवानों तक, बॉलीवुड कलाकारों से लेकर नामचीन खिलाड़ियों तक, बड़े-बड़े उद्योगपतियों से लेकर आध्यात्मिक गुरुओं तक, सभी इस अभियान से जुड़ते चले गए। इसमें अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल और मैरी कॉम जैसी हस्तियों के योगदान बेहद सराहनीय हैं।

विश्व शौचालय दिवस इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए सबसे अच्छा मंच प्रदान करता है और लोगों को इस कारण के लिए योगदान करने में मदद करता है।