गंगा की सफाई को लेकर मोदी की मुरीद हुई दुनिया

चुनाव का समर है और ऐसे मे हर तरफ से ये सवाल पूछे जा रहे है कि आखिर मोदी सरकार ने पिछले पाँच सालो मे क्या किया है। इस सवाल पर मोदी खुद शहर शहर जवाब और अपना हिसाब दे रहे है तो विरोधी उसपर तंज कसने मे लगे है। हालाँकि जनता साफ तौर पर देख कही है कि हकीकत मे कौन सच परोस रहा है।

गंगा की सफाई को लेकर विदेश मे मोदी काम की तारीफ

गंगा की सफाई को लेकर विदेश मे मोदी काम की तारीफ

हालाकि स्वच्छ भारत अभियान को लेकर जो बात मोदी कर रहे है वो जमीन मे भी दिख रही है। जिससे मोदी की शान देश सहित विदेशो मे भी बढ़ी है। खासकर गंगा की सफाई को लेकर जिस तरह से काम हुआ है उसकी तारीफ विश्व मे हर जगह हो रही है। इसी क्रम मे अब अमेरिका के हवाई प्रांत के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस माइकल डी विल्सन ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गंगा नदी के प्रति गहरी आस्था है और उन्हें विश्वास है कि प्राचीन भारतीय पद्धति में गंगा की सफाई का कोई न कोई उपाय जरूर होगा। सरकार के स्वच्छ गंगा मिशन को शानदार सामुदायिक परियोजना बताते हुए उन्होंने कहा, “मोदी नदी की परवाह करने के मामले में बेहद संजीदा व्यक्ति हैं। मोदी नदी की चिंता करते हैं। उन्होंने कहा, जब कोई गंगा में जाता है, तो वह सिर्फ गीला नहीं होता बल्कि प्रेरणा ग्रहण करता है। प्रदूषित होने के बावजूद गंगा को छोड़ा नहीं गया, लोग अब भी इसके प्रति श्रद्धा रखते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि इसे स्वच्छ जरूर बनाया जाएगा। इसकी सफाई के लिए एक भारतीय समाधान होगा, जिसमें एक महान दृष्टिकोण होगा।“ गौरतलब है कि जस्टिस विल्सन ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया द्वारा आयोजित ‘ग्रीन लॉ’ व्याख्यान में ‘पर्यावरण न्याय और कानून के नियम : न्यायपालिका और न्यायाधीशों की भूमिका’ पर बोल रहे थे। जेजीयू के वीसी सी राज कुमार के आमंत्रण पर जस्टिस विल्सन यहां पहुंचे।

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इतना ही नही मोदी किस तरह से जल सकंट को लेकर सजग है ये उनके संकल्प पत्र से भी पता चलता है। मोदी जी ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि सत्ता मे आने के बाद वो जल संकट से निपटने के लिये एक अलग मंत्रालय बनवायेगे। यानी की पानी की किल्लत को लेकर वो कितने सजग है इस बात से पता चलता है कि उनके दिमाग मे अभी से इस बाबत खाका खिच गया है और ये तो सब जानते है कि मोदी जो तय कर लेते है उसे पूरा भी जरूर करते है। मतलब अगर वो जल संकट को दूर करने की बात कर रहे है तो उनके पास उसका रोड मैप भी तैयार होगा। और भारत ही एक ऐसा देश होगा जो इस सकंट से दूर हो सकेगा।