मजदूर दिवस पर मजदूरों का प्रण

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आज 1 मई है, यानी मजदूर दिवस उन लोगों का दिन जिनके संघर्ष की कहानी अमिट है। जिनके हौसलो के आगे आसमान हो या धरती सब छुकते है। जो अपनी मेहनत से खुद का नही बल्कि देश और समाज का भाग्य बदलते है। आज एक बार फिर से इस वर्ग के सामने चुनौती आ खड़ी हुई है। अपने वजूद की शक्ति को दिखाने की   आज विश्व में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, उसको देखकर ये कहना गलत नही होगा कि मजदूरों, कामगारों को फिर से नये संघर्ष के लिये तैयार होना पड़ेगा और इस बार ये संघर्ष अपने लिए नही बल्कि भारत माता के लिये करना होगा। जिससे देश की आर्थिक गाड़ी फुल स्पीड में दौड़ सके।  

कामगारों को लिखनी होगी नई गाथा

देश में पिछले 1 महीने से तालाबंदी चल रही है। जिसने देश की आर्थिक स्थिति की हालत किसी से छुपी नही है। वैसे सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए हर संभव प्रयास में सरकार जुटी है। कई बड़े पैकेज के ऐलान भी किये गये है। कारखानो में जंग न लगे इसके लिये कंपनियों को सहूलियत देने वाले फैसले भी किये गये है। लेकिन इसके बाद भी आर्थिक जगत को कोई आगे ले जा सकता है, तो वो हमारे कामगार भाई है। कोरोना संकट से निपटने के बाद देश तेजी से आगे बढ़े इसके लिये कामगारो को अज इस पावन दिन में प्रण लेना होगा, कि वो देश की जो रफ्तार धीरी हुई है उसे गति देने के लिये तेजी के साथ आगे आयेगे। वैसे इतिहास गवाह है कि देश का मजदूर अगर प्रण कर लेता है तो उसे पूरा करके ही दम लेता है। क्योकि ये वो वर्ग है ,जो लोहा को पिघलाकर मनचाहा आकार देता है। ऐसे में आने वाले वक्त में कामगारो को देश के लिए नये संधर्ष के लिये तैयार रहना होगा।

सरकार और मजदूरों में हो समंजस

यहां ये भी गौर करना होगा कि सरकार और कामगारों के बीच समंजस भी बहुत जरूरी है। क्योकि इसी के दम पर दोनो मिल कर देश की आर्थिक हालात को बेहतर बना पायेगे अगर मजदूर दिनरात श्रम करके उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेंगे, तो दूसरी तरफ सरकार को नई योजना बनाकर इन मजदूरो के हितो का ध्यान रखना होगा वैसे कामगारो को लेकर मोदी सरकार पहले से ही कई योजनाए चला रही है। अब इस लॉकडाउन में ही ले लीजिये सरकार की  पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 2000 हजार रूपये दिये जा रहे है। कोरोना संकट के समय में 2.17 करोड़ निर्माण श्रमिकों को 3,497 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता दी गई है।साथ ही  100 से कम कामगारों वाले प्रतिष्ठानों में प्रति माह 15,000 रुपये से कम वेतन पाने वालों के पीएफ खातों में अगले 3 महीनों तक मासिक वेतन का 24% भुगतान करके पूरा पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ऐसे कई फैसले और भी लिये गये है, जो ये बताता है कि सरकार और मजदूरो के बीच में विश्वास की डोर कितनी मजबूत है।

वैसे कोरोना काल में जिस तरह से संकट से देश को डॉक्टर, पुलिस और सफाई कर्मचारियों ने उबारा है, वैसे ही अब जब लॉकडाउन खत्म होगा, तो आर्थिक रथ को सरपट दौड़ाने के लिये कामगारो को तैयार होना पड़ेगा। जिससे देश समूचे विश्व में एक नये रूप में उभरकर सामने आये। औऱ लगता तो यही है कि इस प्रण को देस के कामगारों ने ले भी लिया होगा। क्योकि यही वो वर्ग जिसके लिये कहा जाता है कि वो अपनी तकदीर अपनी मेहनत से बनाते है।


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