महिलाओं ने लिखी सफलता की नयी दास्तान, संभाली चंद्रयान 2 की कमान

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इस बात से तो हर कोई रूबरू है कि भारतीय महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराने में और देश का गौरव बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है| समाज की प्राचीन और पुरुषप्रधान सोच से परे हट उन्होंने अपने रुतबे और अपनी काबिलियत का लोहा पुरे दुनिया में कायम किया है| विज्ञानं, खेल, फिल्म, राजनीती, कला, ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा जिसमें महिलाओं ने सफलता प्राप्त न की हो| अब एक और बड़ी सफलता भारतीय महिलाओं के नाम होने जा रही है|

चंद्रयान 2 की कमान महिला अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के हाथ

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक बार फिर चांद पर अपना उपग्रह भेजने जा रहा है, जिसे 15 जुलाई को सुबह 2:51 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से छोड़ा जाएगा| वैसे तो साल 2008 के अक्टूबर में भी ISRO ने चंद्रयान-1 चांद पर भेजा था| पर इस बार ये अभियान इसीलिए खास है क्योंकि यह पहला ऐसा अंतरग्रहीय मिशन होगा जिसका नेतृत्व दो महिलाएं कर रही है| ऋतू करिधल इसकी मिशन डायरेक्टर और एम. वनीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं|

ISRO में महिलाओं का रुतबा

ISRO के अध्यक्ष डॉ. के सिवन ने चंद्रयान 2 की प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ”हम महिलाओं और पुरुषों में कोई अंतर नहीं करते, इसरो में क़रीब 30 प्रतिशत महिलाएं काम करती है|” ऐसा पहली बार नहीं है जब महिलाओ ने किसी अभियान में मुख्य भूमिका निभाई है| इससे पहले भी मंगल मिशन में 8 महिलाओ की अहम भूमिका रही थी|

आइये जानते है चंद्रयान 2 की कमान संभाल रही महिला वैज्ञानिकों के बारे में

ऋतू करिधल – राकेट वुमन ऑफ़ इंडिया

 Ritu Karidhal

चंद्रयान 2 की मिशन डायरेक्टर ऋतू करिधल को ‘राकेट वुमन ऑफ़ इंडिया’ भी कहा जाता है | वह मार्स ऑर्बिटर मिशन में ऑपरेशन डायरेक्टर भी रह चुकी है| लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट करिधल ने एरोस्पेस में इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त की है| साल 2007 में उन्हें पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से इसरो यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड भी मिल चुका है|

करिधल को बचपन से ही विज्ञान में दिलचस्पी थी| मार्स ऑर्बिटर मिशन के बाद अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि, ”मैं चांद का आकार घटने और बढ़ने को लेकर हैरान होती थी और अंतरिक्ष के अंधेरे के पार की दुनिया के बारे में जानना चाहती थी|” फिजिक्स और मैथ्स ऋतू के पसंदीदा विषय हैं| वो बताती है की नासा और इसरो प्रोजेक्ट्स से जुड़े अख़बार में ख़बरों की कटिंग्स वो रखा करती थी और स्पेस साइंस से जुडी हर छोटी बात को भी समझने की कोशिश करती थी|

विज्ञान और अंतरिक्ष को लेकर उनका यही जुनून उन्हें इसरो तक ले गया | वो बताती हैं, ”पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री पूरी करने के बाद मैंने इसरो में नौकरी के लिए अप्लाई किया था और इस तरह मैं स्पेस साइंटिस्ट बन पाई|” वह करीब 20-21 साल से इसरो से जुड़ी हुई हैं और अब तक कई मिशन पर काम कर चुकी है| जिसमे अब तक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मिशन मार्स ऑर्बिटर रहा है|

ऋतू का मानना है की परिवार के सहयोग के बिना कोई भी अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता है | ऋतू के दो बच्चे है, एक बेटा और एक बेटी| उनका कहना है कि माँ बनने के बाद वो घर से ही ऑफिस का काम करती थी और तब उनके पति बच्चों को सँभालने में उनकी पूरी सहायता करते थे| उनका मानना है की अगर आपका जूनून पक्का होता है तो आपका परिवार भी हर तरह से साथ निभाता है|

उन्होंने बताया, ”जब मेरा बेटा 11 साल का और बेटी 5 साल की थी, तब हम समय बचाने के लिए मल्टीटास्किंग करते थे| ऑफ़िस में बुरी तरह थक जाने के बावजूद जब मैं घर जाकर अपने बच्चों को देखती और उनके साथ समय बिताती थी तो मुझे बहुत अच्छा लगता था|”

स्टार प्लस के एक कार्यक्रम ‘टेड टॉक’ में ऋतू करिधल ने कहा था, “मुझे लगता है जो आत्मविश्वास मुझे मेरे माता-पिता ने 20 साल पहले दिया था वो आज लोग अपनी बच्चियों में दिखा रहे हैं| लेकिन हमें देश के गांवों, कस्बों में ये भावना लानी है कि लड़कियां चाहे बड़े शहर की हों या कस्बों की पर अगर मां-बाप का सहयोग हो तो वो बहुत आगे बढ़ सकती हैं|”

एम वनिता – चंद्रयान 2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर

Project Director of Chandrayaan-2 M Vanita

एम वनिता चंद्रयान 2 में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत है| वनिता ने डिजाईन इंजिनियर का प्रशिक्षण प्राप्त किया है| यही नहीं वनिता को एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया से 2006 में बेस्ट वुमन साइंटिस्ट का अवॉर्ड भी मिल चुका है| वो बहुत सालों से सेटेलाइट पर काम करती आई हैं|

विज्ञान मामलों की जानकारी रखने वाले पल्लव बताते है कि किसी भी मिशन का एक ही प्रोजेक्ट डायरेक्टर होता है जिस पर अभियान की पूरी जानकारी होती है| उनका कहना ये भी है की किसी मिशन के एक से ज्यादा मिशन डायरेक्टर हो सकते है जैसे ऑर्बिट डायरेक्टर, सेटेलाइट या रॉकेट डायरेक्टर| रितू करिधल कौन सी मिशन डायरेक्टर हैं अभी ये साफ़ नहीं है|

बतौर प्रोजेक्ट डायरेक्टर वनिता को चंद्रयान 2 मिशन के सभी पहलुओं को बारीकी से देखना होगा जिससे अभियान सफल हो सके| मिशन का हर काम उनके देख-रेख में ही होगा| आपको बता दे की प्रोजेक्ट डायरेक्टर के ऊपर एक प्रोग्राम डायरेक्टर भी होता है|

चंद्रयान 2 का सफल होना भारतियों के लिए अपने आप में एक गर्व की बात होगी, खास कर महिलाओं के लिए क्योंकि चंद्रयान 2 की सफलता महिलाओं के काबिलियत की एक नयी दास्तान लिखेगी|

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