छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लड़ेंगी महिला कमांडो

छत्तीसगढ़ के बस्तर और दंतेवाड़ा में नक्सल प्रभावित इलाकों में पहली बार महिला एंटी नक्सल कमांडो यूनिट को तैनात किया गया है।

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पहली बार 30 महिला सदस्यों की एक यूनिट को जंगल में नक्सलियों से लड़ने के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी गई है और उनको नक्सलियों के निपटने के लिए तैयार कर उनको लाल आतंक के खिलाफ तैनात किया गया है। इस नक्सल विरोधी महिला दस्ते को ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ का नाम दिया गया है। देवी दंतेश्वरी के नाम पर ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ नाम से गठित यह विशेष दस्ता राजधानी रायपुर से करीब 400 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में जिला रिजर्व गार्ड में शामिल किया गया है। इस यूनिट में 10 पूर्व नक्सली महिलाओं को भी शामिल हैं जिन्होंने पहले आत्मसमर्पण कर दिया था। बस्तर जिले के आईजी विवेकानंदा सिन्हा ने दंतेश्वर लड़ाके यूनिट के बारे में बताया कि महिला पुलिस कमांडो अपने पुरुष समकक्षों के साथ काम करने जा रही हैं। मझे भरोसा है कि महिला कमांडो अच्छा काम करेंगी और यह महिला सशक्ती करण का एक अच्छा उदाहरण है।

बता दें कि पुलिस ने पहली बार नक्सल विरोधी फ्रंटलाइन फोर्स जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) में महिला कमांडो को जगह दी है। इससे पहले बस्तर में राज्य पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों में महिला सैनिकों को अभियान में शामिल किया गया है, लेकिन वहां उनकी भूमिका सीमित थी। पहली बार पूरी तरह महिला कमांडो की टीम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुरुष डीआरजी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभियान का संचालन करने के लिए गठित की गई है। जिसके कारण अब राज्य में महिला कमांडो दस्ता भी नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाते हुए नजर आएगी।

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इन महिला कमांडों को बाइक चलाने की ट्रेनिंग के साथ ही हाई टेक तकनीक का भी इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही इन्हें आधुनिक हथियार चलाने की भी ट्रेनिंग दी गई है और उनको इस जंगली क्षेत्र से पूरी तरह से अवगत कराया गया है ताकि ये हर परिस्थिति में नक्सलियों से मुकाबला कर सकें।