नई शिक्षा नीति से देश का युवा ज्ञानी के साथ साथ होगा हुनरमंद

नई शिक्षा नीति को लेकर वैसे तो देश के हर कोने से समर्थन मिल रहा है, लेकिन एक बार फिर पीएम मोदी ने इस नीति को जमीन पर सफल बनाने के लिए शिक्षको को मंत्र दिया। पीएम मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के पीछे पिछले चार-पांच वर्षों की कड़ी मेहनत है। हर क्षेत्र, हर विधा, हर भाषा के लोगों ने इस पर दिन रात काम किया है, लेकिन ये काम अभी पूरा नहीं हुआ है। क्योकि अभी नए भारत की, नई उम्मीदों की, नई आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम इसे बनाना है।

दुनिया बदली है तो शिक्षा के पुराने ढर्रे को भी बदलना होगा

ये बात बिलकुल ठीक है, कि दुनिया तेजी के साथ बदल रही है, लेकिन हमारी शिक्षा की व्यवस्था वही पुराने तौर तरीके से चल रही थी। जो भविष्य निर्माण में बाधा तो थी ही, साथ ही हमारे बच्चों के लिये भी आने वाले कल को कमजोर कर रही थी। ऐसे में शिक्षा का ये नया फार्मूला बच्चो को आगे ले जाएगा। इसके लिए 21वीं सदी की स्किल्स के साथ आगे बढ़ाना होगा। खुद पीएम मोदी ने इस स्किल्स का जिक्र किया और बताया कि क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी, कोलेबोरेशन, क्यूरोसिटी और कम्युनिकेशन पर बल देना होगा जिससे बच्चों का भविष्य सुधर सके, सिलेबस को कम किया जा सके और फंडामेंटल चीजों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। लर्निंग को इंटिग्रेटिड एवं इंटर-डिसिप्लीनेरी, फन बेस्ड और कंप्लीट एक्सपीरियंस बनाने के लिए एक नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क डेवलप किया जाएगा जो एक बेहतर कल की स्थापना करेगा, जो हमारे देश के भविष्य निर्माण की नींव मजबूत करे।

हमें आसान और नए-नए तौर-तरीकों को बढ़ाना होगा

पीएम मोदी ने शिक्षकों से बात करते हुए बच्चों को पढ़ाने की विधि में बदलाव की बात पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि छोटे छोटे बच्चों को पुरानी व्वस्था के तहत हम पढ़ा सकते है, लेकिन वो जीवन में बढ़ नही पाते है। बच्चों को नई शिक्षा नीति के जरिए ज्ञान के साथ साथ आगे बढ़ने का भी मौका मिलेगा। इसके लिये देश के शिक्षकों को बड़ा किरदार निभाना होगा। नए नए आसान तरीको से बच्चों को सिखाना होगा। इसके लिए भी पीएम मोदी जी ने शिक्षको को कुछ नए मंत्र दिए। पीएम मोदी जी ने बताया कि न्यू एज लर्निंग का मूलमंत्र होना चाहिए इंगेज, एक्सप्लोर, एक्सपीरियंस, एक्सप्रेस और एक्सेल। मूलभूत शिक्षा पर ध्यान इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी के विकास को एक राष्ट्रीस मिशन के रूप में लिया जाएगा। जब शिक्षा को आस-पास के परिवेश से जोड़ दिया जाता है तो, उसका प्रभाव विद्यार्थी के पूरे जीवन पर पड़ता है, पूरे समाज पर भी पड़ता है। आज हम देखें तो प्री-स्कूल की प्लेफुल एजुकेशन शहरों में प्राइवेट स्कूलों तक ही सीमित है। ये शिक्षा व्यवस्था अब गांवों में भी पहुंचेगी, गरीब के घर तक पहुंचेगी।

पीएम मोदी जी ने अपने इस भाषण से ये समझाने की कोशिश की है कि आने वाले दिनो में नई शिक्षा नीति से बच्चों पर पढ़ाई का बोझ तो कम होगा ही, साथ ही साथ जिस तरफ उनका मन ज्यादा लगता वो उसी चीज को ज्यादा सीखेंगे जिससे बच्चों का विकास तो होगा ही देश भी आगे बढ़ेगा और देश का आने वाला युवा ऐसा होगा जो ज्ञानी भी होगा और हुनरमंद भी।