पीएम मोदी के प्रयास से गंगा में दिखने लगे है शुभ संकेत

लोकसभा चुनाव 2014 के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी में कहा गया वाक्य ‘मैं आया नहीं मुझे मां गंगा ने बुलाया है’ दिखाता है कि उन्हें गंगा नदी से अगाध प्रेम है। गंगा मइया को अविरल-निर्मल बनाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयास अब रंग लाता दिखाई देने लगा है। हाल ही में गंगा बैराज से शेखुपुर तक लिये गंगा जल के सैंपल की जांच में शुभ संकेत दिखाई दिए हैं। प्रदूषण से राहत की संजीवनी मिलने पर गंगा मइया फिर से खिलखिला उठी हैं। घोंघा, झींगा और सीप की बढ़ी तादाद बता रही है कि गंगा जल निर्मल है और जल में घुलित ऑक्सीजन का लेवल भी खासा बढ़ गया है।

गंगा बैराज से शेखपुर तक लिए गंगा जल के सैंपल

बता दे की हाल ही गंगा बैराज से शेखपुर तक लिए गंगा जल के सैंपल की जाँच में शुभ संकेत दिखाई दिए हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि गंगा बैराज और शेखपुर में गंगा जल के नमूनों की जांच की। इसमें एक फरवरी से लेकर अब तक के आंकड़ों के मुताबिक गंगा में घोंघा, सीप व झींगा का विचरण बढ़ा है। घुलित ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा बढऩे पर ही यह जलीय जंतु जीवित रहते हैं। साल 2014 में डीओ औसतन साढ़े छह मिलीग्राम प्रतिलीटर थी जो अब बढ़कर 11 मिलीग्राम प्रति लीटर के करीब पहुंच गई है। यह किसी भी नदी में पाई जाने वाली ऑक्सीजन की सामान्य मात्रा से अधिक है। रिपोर्ट में इसे आदर्श स्थिति बताया गया है। छह साल पहले रोगजनक बैक्टीरिया की मात्रा अधिकतम 99 हजार प्रति सौ मिली थी जो अब 35 हजार प्रति सौ मिली रह गई है। ऐसे में गंगा का जल अब आचमन योग्य हो गया है।

क्या है डीओ (डिजाल्व आक्सीजन)

जल में ऑक्सीजन की मात्रा का एक लेवल होता है। जब पानी में हानिकारक केमिकल की मात्रा अधिक हो जाती है, तो ऑक्सीजन कम हो जाती है। डिजॉल्व ऑक्सीजन एक लीटर में मिलीग्राम के हिसाब से मापी जाती है।

जलीय जीवों के लिए पानी का मानक

पेयजल व जलीय जीवों के लिए पानी की शुद्धता के मानक तय हैं। मानक के अनुसार पानी में पीएच की मात्रा 6.5 से 8.5 के बीच होनी चाहिए। इसके अधिक पीएच वाला पानी अम्लीय माना जाता है। जो जलीय जीवों के लिए खतरनाक माना जाता है पानी में डीओ कम व अधिक टीडीएस होने से जलीय जीवों को खतरा होता है। टीडीएस की अधिक मात्रा से जल पेट संबंधी बीमारियों का वाहक भी बनता है। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) अधिक होने से पानी सडऩे लगता है।

मुख्यमंत्री योगी ने शुभ संकेत पर ख़ुशी जताया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस रिपोर्ट पर खुशी जताते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि कानपुर में गंगा को शुद्ध करने के साथ ही वहां के चमड़ा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में भी सरकार कार्य कर रही है।

प्रधानमंत्री ने शुरू किया नमामि गंगे प्रोजेक्ट

गंगा नदी का न सिर्फ सांस्कृतिक महत्व है, बल्कि आध्यात्मिक महत्व भी है। इसी महत्ता के कारण ही केंद्र सरकार ने गंगा को निर्मल करने के लिए ‘नमामि गंगे’ परियोजना लांच किया था। नमामि गंगे परियोजना मोदी सरकार की ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके तहत गंगा की सफाई से लेकर घाटों को जीर्णोद्धार कराया गया। इसी क्रम में शहर में 128 साल पुराने सीसामऊ नाला से 14 करोड़ लीटर से अधिक सीवेज पानी गंगा में गिरता था को अब इसे पूरी तरीके से बंद कर दिया गया है। कानपुर शहर में गंगा को अविरल और निर्मल करने के लिए यह उपलब्धि ऐतिहासिक रही।

कानपुर में नमामि गंगे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर टेनरियों का दूषित जल का प्रवाह गंगा में बंद कराया गया। बीते दिसंबर माह नमामि गंगे के तहत आयोजित बैठक में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की निर्मलता और अविरल का जायजा लिया था। इसके साथ ही इतिहास बन चुके सीसामऊ नाले पर बने सेल्फी प्वाइंट को भी देखा था।