अंतरिक्ष मिशन के साथ अब मोदी सरकार ने ‘गहरे समुद्री मिशन’ को दिखाई हरी झंडी

मोदी सरकार समुद्र मंथन करने जा रही है इसमें सरकार करीब 4000 करोड़ रूपये खर्च करेगी। सरकार के इस फैसले के बाद अब जल्द ही देश के कुछ बुध्दजीवी इसे कोरोना काल में पैसा की बर्बादी बताकर मोदी सरकार पर हमला करेगी। ऐसे में भ्रम फैलाने वालों को हम पहले ही बता दें कि इस योजना से आने वाले वक्त में भारत को क्या क्या फायदा होने वाला है। वैसे हिंदुस्तान के तीन किनारे महासागरों से घिरे हैं और देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी तटीय क्षेत्रों में रहती है। यह मिशन समुद्री जीव विज्ञान में क्षमता विकास की दिशा में भी निर्देशित है, जो भारतीय उद्योगों में रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। इससे और क्या क्या फायदा भविष्य में भारत को होगा चलिये हम बताते हैँ।

गहरे समुद्र में खनन और पनडुब्बी के लिए टेक्‍नोलॉजी का विकास

तीन लोगों को समुद्र में 6,000 मीटर की गहराई तक ले जाने के लिए वैज्ञानिक सेंसर और उपकरणों के साथ एक मानवयुक्त पनडुब्बी विकसित की जाएगी। बहुत कम देशों ने यह क्षमता हासिल की है। मध्य हिंद महासागर में 6,000 मीटर गहराई से पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स के खनन के लिए एक एकीकृत खनन प्रणाली भी विकसित की जाएगी। भविष्य में संयुक्त राष्ट्र के संगठन इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी के द्वारा वाणिज्यिक खनन कोड तैयार किए जाने की स्थिति में, खनिजों के अन्वेषण अध्ययन से निकट भविष्य में वाणिज्यिक दोहन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह घटक नील अर्थव्यवस्था के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, गहरे समुद्र में खनिजों और ऊर्जा की खोज और दोहन में मदद करेगा।

समुद्री जलवायु परिवर्तन सलाहकार सेवाओं का विकास

इसके तहत मौसम से लेकर दशकीय समय के आधार पर महत्वपूर्ण जलवायु परिवर्तनों के भविष्यगत अनुमानों को समझने और उसी के अनुरूप सहायता प्रदान करने वाले अवलोकनों और मॉडलों के एक समूह का विकास किया जाएगा। यह ब्लू इकोनॉमी की प्राथमिकता वाले तटीय क्षेत्र पर्यटन में मदद करेगा। इतना ही नहीं सूक्ष्म जीवों सहित गहरे समुद्र की वनस्पतियों और जीवों की जैव-पूर्वेक्षण और गहरे समुद्र में जैव-संसाधनों के सतत उपयोग पर अध्ययन इसका मुख्य केंद्र होगा। यह ब्लू इकोनॉमी की प्राथमिकता वाले क्षेत्र समुद्री मात्स्यिकी और संबद्ध सेवाओं को मदद प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य समुद्री बायोलॉजी और इंजीनियरिंग में मानव क्षमता और उद्यम का विकास करना है। यह घटक ऑन-साइट बिजनेस इन्क्यूबेटर सुविधाओं के माध्यम से अनुसंधान को औद्योगिक अनुप्रयोग और उत्पाद विकास में परिवर्तित करेगा। यह ब्लू इकोनॉमी की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे महासागर जीव विज्ञान, नील व्यापार और नील विनिर्माण में मदद करेगा।

रोजगार के अवसर पैदा होंगे

सरकार की माने तो गहरे समुद्र में खनन के लिए आवश्यक टेक्नोलॉजी का रणनीतिक महत्व है, लेकिन ये कमर्शियल तौर पर उपलब्ध नहीं है इसलिए अग्रणी संस्थानों और निजी उद्योगों के सहयोग से टेक्नोलॉजी को स्वदेश में ही निर्मित करने का प्रयास किया जाएगा। एक भारतीय शिपयार्ड में गहरे समुद्र में खोज के लिए एक शोध पोत बनाया जाएगा जो रोजगार के अवसर पैदा करेगा। यह मिशन समुद्री जीव विज्ञान में क्षमता विकास की दिशा में भी निर्देशित है, जो भारतीय उद्योगों में रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। इस मिशन से विशेष उपकरणों, जहाजों के डिजाइन, विकास और निर्माण और आवश्यक बुनियादी ढांचे की स्थापना से भारतीय उद्योग, विशेष रूप से एमएसएमई और स्टार्ट-अप के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। विश्व के लगभग 70 प्रतिशत भाग में मौजूद महासागर, हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बने हुए हैं। गहरे समुद्र का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा अभी तक खोजा नहीं जा सका है।

भारत के तीन किनारे महासागरों से घिरे हैं और देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी तटीय क्षेत्रों में रहती है। महासागर मत्स्य पालन और जलीय कृषि, पर्यटन, आजीविका और नील व्यापार का समर्थन करने वाला एक प्रमुख आर्थिक कारक है। महासागर न सिर्फ भोजन, ऊर्जा, खनिजों, औषधियों, मौसम और जलवायु के भंडार हैं बल्कि पृथ्वी पर जीवन का आधार भी हैं। इसी को ध्यान में रखकर मिशन मोड में सरकार अब काम करने जा रही है।