संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त; अब सदन में होता है काम ही काम

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Winter session of Parliament ends

मोदी सरकार2.0 का पहला शीतकालीन सत्र आज से समाप्त हो गया। इस सत्र में पूरी तरह पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा और NDA सरकार का जलवा दिखा। सरकार की कुशल रणनीति और राजनीतिक चातुर्य के आगे विपक्ष धराशाई हो गया। सरकार के एजेंडे में शामिल कई महत्वपूर्ण बिल आसानी से कानून में तब्दील हो गये। जिनमें बहुप्रतीक्षित नागरिकता बिल भी शामिल था।

संसद के शीतकालीन सत्र का आज अंतिम दिन दोनों सदनों ने संसद पर आतंकी हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उसके बाद भाजपा की महिला सांसदों ने राहुल गांधी के ‘रेप इन इंडिया’ वाले बयान पर संसद में जोरदार हंगामा किया और उनसे माफी मांगने की मांग की। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के पास सांसद होने का नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें संसद में माफी मांगनी चाहिए। हंगामे के बीच संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थंगित कर दी गई है। ये सत्र मोदी सरकार के लिए काफी अहम रहा। इस शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन विधेयक, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) और चिट फंड संशोधन विधेयक सहित कई महत्व पूर्ण विधेयक पारित किये गये। बता दे कि संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू हुआ था।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि शीतकालीन सत्र में 130 घंटे 45 मिनट का कामकाज हुआ। उन्होंने कहा कि सदन की उत्पादकता 115 प्रतिशत रही। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सत्र के दौरान अनेक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए और विभिन्न मुद्दों पर बहस हुई।

राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने समापन भाषण में कहा कि सदन की उत्पादकता लगभग एक सौ प्रतिशत रही और 15 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें मुख्य हैं – नागरिकता संशोधन विधेयक, किन्नर अधिकार संरक्षण विधेयक और ई-सिगरेट निषेध विधेयक। उन्होंने कहा कि व्यावधान के कारण सत्र में 11 घंटे से अधिक समय बर्बाद हुआ। हालांकि सदन का कामकाज पूरा करने के लिए सदस्य निर्धारित समय से भी ज्यादा देर तक बैठे। सभापति ने राज्यसभा के 250वें सत्र को ऐतिहासिक सत्र करार देते हुये कहा कि इसकी गंभीरता एवं संक्षिप्तता महत्वपूर्ण रही।

संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर दोनों ही सदनों में काफी बहस हुई। हालांकि, बहस के बाद ये बिल पास हो गया और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही ये कानून में तब्दील हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल के पास होने पर खुशी जताई और इसे भारत के इतिहास में मील का पत्थर बताया था। हालाँकि असम में नागरिकता संशोधन बिल पर सियासी संग्राम गहराने लगा है। यहाँ नागरिकता विधेयक को लेकर विरोध और तेज हो गया है। पीएम मोदी ने कहा है कि, ‘कांग्रेस और उसके साथी पूर्वोत्तर में भी आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वहां भ्रम फैलाया जा रहा है कि बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग आ जाएंगे। जबकि ये कानून पहले से ही भारत आ चुके शरणार्थियों की नागरिकता के लिए है।

 


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