दिल्ली चुनाव में क्या ये मुद्दे रहेंगे हावी?

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दिल्ली में इस वक्त चुनाव का दौर पूरे परवान पर है। सत्ता पक्ष अपने काम का बखान गा रही है, तो विपक्ष सत्ता पक्ष के कामकाज की पोल खोल रही है। इन सब के बीच दिल्ली का वोटर चुपचाप होकर 8 फरवरी का इंतजार कर रहा है। पर ये जरूर है, कि इस बार दिल्ली चुनाव में ये मुद्दे हावी रहने वाले है।

राष्ट्रवाद का मुद्दा- CAA के विरोध को लेकर बीते 1 महीने से ज्यादा वक्त से शाहीन बाग में धरना चल रहा है। खासबात ये है कि अब शाहीन बाग का धरना राष्ट्रवाद के विरोध में दिखने लगा है। खासकर कुछ लोग यहां से जैसे जैसे नारे छोटे छोटे बच्चों से लगवा रहे है, उसको ध्यान में रखकर आज सत्ता पर विपक्ष हमला बोल रही है। लगता यही है कि शाहीन बाग VS राष्ट्रवाद चुनाव का खास मुद्दा रहने वाला है।

प्रदूषण का मुद्दा- दिल्ली में प्रदूषण का मुद्दा सबसे बड़ा है, बीते कुछ सालों से दिल्ली की फिजाओं में सर्दी आने से पहले जहर इस कदर घुलता है कि दिल्ली में रहना दूभर हो जाता है जिसके चलते दिल्ली को दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले शहर का तमगा भी मिल जाता है। हालाकि प्रदूषण दूर करने के उपाय करना दूर इसपर सिर्फ कोरी सियासत ही दिल्ली वालो ने देखी है इसलिये ये मुद्दे को ध्यान में रखकर दिल्लीवाले वोट जरूर देंगे और चुनाव में सत्ता पक्ष विपक्ष के नेताओं के भाषण में भी ये मुद्दा खूब छाया हुआ है।

साफ पानी का मुद्दा- आजादी के 70 साल से भी ज्यादा समय बीत चुका है,लेकिन देश की राजधानी में ही पानी की समस्या 12 महीने देखी जाती है। संसद और राष्ट्रपति भवन से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर संगम बिहार हो या फिर 25 किलोमीटर पर नजफगढ़ आज भी पानी की समस्या से लड़ाई करते हुए दिखाई देते है। इतना ही नही दिल्ली के कई इलाके ऐसे भी है जहां पानी तो आता है, लेकिन वो भी गंदा जिससे लोगों की दिक्कते बढ़ती जा रही है। शायद आज दिल्ली का कोई ऐसा इलाका नहीं है जहां बोतल वाला पानी खरीदा नही जाता हो। इस लिये ये मुद्दे को ध्यान में रखकर भी दिल्लीवाले वोट जरूर डालेगे।

महिला सुरक्षा- महिला सुरक्षा पर दिल्ली में यू तो सियासत बीते 10 सालो में खूब देखी गई है, महिला को सुरक्षा प्रदान करने को लेकर नेताओं ने बड़े बड़े वादे भी किये है। लेकिन जमीनी हकीकत में जाकर इन वादो को देखा जाये तो नतीजा सिर्फ शून्य निकलता है। वैसे सत्ता पक्ष से जब इस बारे में पूछा जाता है तो वो इसका जवाब देने से बचते हुए दिखाई देते है, या इसका ढ़ीकरा दूसरो पर डालने लगते है।

भ्रष्टाचार का मुद्दा- ये वो मुद्दा है जिसपर 15 साल सत्ता में काबिज रहने वाली शीला जी का किला ताश के पत्तो की तरह गिर गया था लेकिन किले को गिराने वाले भी भ्रष्टाचार की कालिख से बच न सके। खुद सीएम साहब हो या फिर उनके मंत्री सभी पर भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आये। ऐसे में दिल्लीवाले इस मुद्दे पर विचार करके पोलिंग बूथ तक जरूर जायेगी।

इसके साथ साथ परिवाहन, सड़क रोजगार ऐसे मुद्दे है, जिन्हे याद रखकर वोटर अपने घर से निकलेगा लेकिन ये तो है कि असल वोटर दिल्ली का बिलकुल चुप है और उसके मन में क्या चल रहा है ये अभी पार्टिया समझ नहीं पा रही है। लेकिन इतना तो तय है कि विकास और दिल्ली को बेहतर सुविधा देने वालो के साथ ही दिल्ली खड़ी होगी। ये तय है।

 


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