कोर्ट के फैसले के बाद क्या खत्म होगी कृषि बिल पर तकरार

कृषि कानून पर चली आ रही सियासत के बीच आज कोर्ट ने कृषि कानून के अमल पर रोक लगा दी है। इसके साथ साथ कोर्ट ने एक कमिटी भी बनाने के आदेश दिए है। लेकिन इसके बाद अब सवाल ये उठता है कि क्या कोर्ट के फैसले के बाद किसान संगठन अपना आंदोलन खत्म कर देंगे?

तीनो कृषि कानून पर फिलहाल रोक

सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में विवाद के समाधान के लिए एक कमिटी बनाई जाएगी और अगले आदेश तक कानून के अमल पर रोक लगी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने अर्जी दाखिल कर कहा कि किसानों के ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाई जाए जिसपर सोमवार को सुनवाई की जायेगी। लेकिन कोर्ट के फैसले सुनाने के वक्त किसान संगठनों की तरफ के वकील नदारद रहे जिससे ये लगता है कि क्या कोर्ट के किसान के पक्ष में फैसला करने के बाद भी आंदोलन जारी रखा जायेगा। तो लगता तो यही है कि किसान अभी आंदोलन खत्म करने के मूड में नही है किसान नेता इस बाबत खुलकर बोलते हुए भी दिख रहे है किसान नेताओं के इन बयानो ने ये साफ होता दिख रहा है कि किसान आंदोलन के पीछे कुछ और मकसद है और वो मकसद है सिर्फ मोदी सरकार की छवि खराब करना ये सब इस लिये किया जा रहा है कि क्योकि विपक्ष हो या मोदी विरोधी किसी के पास कोई भी ऐसा मुद्दा नही है जो मोदी सरकार के खिलाफ महौल बना सके बस इसीलिये मोदी विरोधी या यूं कहे देश का माहौल खराब करने वाले कुछ तथाकथित किसान बने लोग  सोच रहे है कि किसी तरह इस आंदोलन में सरकार की तरफ से बल का प्रयोग किया जाये और इसका फायदा उटाया जाये लेकिन उन्हे ये नही पता की मोदी किसान विरोधी नही किसान के उथान के लिए काम करते है ऐसे में वो किसान का अहित होने नही देगे और न ही किसान के विरोध में बल का प्रयोग करेगे।

सरकार ने कोर्ट में की किसान आंदोलन में घुसपैठियों की बात

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा गया कि किसानों के प्रदर्शन में कुछ बैन संगठन के घुसपैठी हैं। अटॉर्नी जनरल ने भी इस बात को कन्फर्म किया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा है। कोर्ट को सरकार ने ये भी बताया कि किसान संगठनो में कुछ घुसपैठी है जो मसले का हल नही निकलने दे रहे है। इस बाबत कोर्ट ने उन लोगो के बारे में जानकारी मांगी है। वही सरकार पहले से कहते हुए चली आ रही है कि आंदोलन में पंजाब के अलगाववादी आलिस्तानी संगठन का भी हाथ है और वो पहले दिन से देखा जा रहा है जो किसान के आड़ में माहौल भड़काकर आंदोलन को दूसरा रूप देना चाहते है।

फिलहाल देखना ये होगा कि क्या कोर्ट का किसानों के पक्ष में फैसला आने के बाद सड़को से किसान हटेगे? वैसे कोर्ट के फैसले के आने के बाद जो असल किसान सड़को में भ्रम के चलते प्रदर्शन कर रहे है उन्हे तो जिद्द छोड़कर अब घर वापस हो जाना चाहिये क्योकि फिलहाल तो कृषि बिल पर रोक लग गई है।

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