क्या साढ़े तीन साल तक पीएम मोदी नही बनायेंगे दाढ़ी ?

देश में कोरोना महामारी का साया जब से लगा है तब से ही पीएम मोदी की दाढ़ी लगातार बढ़ी हुई ही देखी जा रही है। करीब 6 से 7 महीने पीएम मोदी ने अपनी दाढ़ी की कटिंग नही करवाई है। तब से लेकर आज तक उनकी बढ़ी दाढ़ी को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं होती रही हैं। इसे कभी कोरोना की गाइडलाइंस को लेकर राष्ट्र के नाम संदेश देने से जोड़कर देखा गया तो कभी इसके राजनीतिक मायने भी निकाले गए। पीएम मोदी के विरोधी तो इसे पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य से भावनात्मक जुड़ाव प्रदर्शित करने की रणनीति से भी जोड़ चुके है। हालांकि उनके दाढ़ी बढ़ाने की वजह के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। पिछले कुछ महीनों में उनकी दाढ़ी और ज्यादा बढ़ चुकी है। इस बीच कर्नाटक के ‘उडुपी पीजवारा पीठ’ के अध्यक्ष स्वामी विश्वप्रसन्ना तीर्थ ने पीएम मोदी के दाढ़ी बढ़ाने को लेकर टिप्पणी की है। वे अयोध्या में निर्माणाधीण राम मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के अहम सदस्य भी हैं।

स्वामी विश्वप्रसन्ना ने राम मंदिर निर्माण से जोड़ा संबंध

पीएम मोदी की दाढ़ी बढ़ाने को लेकर कई बाते सामने आ रही है लेकिन इस बीच स्वामी विश्वप्रसन्ना तीर्थ ने एक बयान  दिया है और इसी दौरान उन्होंने पीएम मोदी के दाढ़ी बढ़ाने को राम मंदिर निर्माण से जोड़ते हुए सनातन धर्म की एक परंपरा का जिक्र किया। हालांकि इस कारण को लेकर कोई पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इस संबंध में आई कुछेक मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी चर्चा की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वामी विश्वप्रसन्ना तीर्थ ने कहा कि प्रधानमंत्री की दाढ़ी के पीछे एक वजह राम मंदिर निर्माण हो सकता है। बता दें कि एक अरसे से ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कराना बीजेपी का उद्देश्य रहा है। पिछले साल रामलला विराजमान के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद इसी साल अगस्त में राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई है। मंदिर के लिए पीएम मोदी के हाथों भूमि पूजन कराया गया है।

मंदिर निर्माण में लग सकते हैं साढ़े तीन साल

जानकारो की माने तो  अयोध्या में राम मंदिर बनकर तैयार होने में करीब 3 से साढ़े तीन साल का समय लग सकता है। हालांकि यह कोई पक्की तारीख नही है, जो मंदिर के डिजाइन में बदलाव या अन्य वजहों से बढ़ भी सकता है। चर्चा ऐसी है कि अगर पीएम मोदी के दाढ़ी बढ़ाने के पीछे राम मंदिर निर्माण का संकल्प है तो क्या अगले तीन-साढ़े तीन साल तक वे दाढ़ी नहीं कटवाएंगे। स्वामी विश्वप्रसन्ना का कहना है कि पीएम मोदी ने मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी है और वे ही ​मंदिर निर्माण पूरा कराने के प्रति जिम्मेदार हैं। मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन कराने के साथ ही पीएम मोदी ने मंदिर निर्माण सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी ली है। सनातन परंपरा के अनुसार, उनके केश नहीं काटे जाने चाहिए। बस इस लिये ही मोदी जी ने अब शेव न बनाने का प्रण लिया है।

बाल-दाढ़ी बढ़ाने के पीछे क्या है धार्मिक मान्यता?

सनातन परंपरा में बाल-दाढ़ी बढ़ाने को लेकर कुछ धार्मिक मान्यताएं होती है। इस संबंध वाराणसी  के पंडित दयानंद पांडेय की माने तो सनातन परंपरा में कई बार किसी महायज्ञ, बहुत बड़े प्रयोजन को लेकर घर या समाज का प्रधान व्यक्ति संकल्प लेता है।इस संकल्प के पूरा होने तक वह अपने केश नहीं कटाता है। प्रयोजन, यज्ञ या वह बड़ा काम पूरा होने के बाद वह अपने केश दान करता है या गंगा में प्रवाहित करता है। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में केश दान करने को लेकर ऐसी कई मान्यताएं होती हैं। दक्षिण भारत की महिलाएं भी काशी आकर अपना सिर मुंडवाती हैं और केश दान करती हैं। ऐसा इसलिए कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान अपनी प्यारी चीज का करना चाहिए और महिलाओं के सौंदर्य के लिए उनके बाल महत्वपूर्ण होते हैं। बालों को ईश्वर प्रदत्त और प्राकृतिक श्रृंगार माना गया है। महिलाओं को उनके बाल बहुत प्यारे होते हैं, इसलिए मान्यता के मुताबिक वे अपना बाल दान करती हैं।

हालांकि पीएम मोदी के दाढ़ी बढ़ाने को लेकर किसी तरह की कोई पुख्ता रिपोर्ट सामने नहीं आई है और न ही कभी उन्होंने इसके पीछे का कारण बताया है। देशभर में उनके दाढ़ी बढ़ाने को लेकर अक्सर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्ना तीर्थ की टिप्पणी भी एक संभावना मात्र हो सकती है। लेकिन हां, इतना तो है कि पीएम मोदी देशवासियों से कुछ छुपाते नही है ऐसे में वो दाढ़ी बढ़ाने के राज से भी खुद पर्दा उठायेगे।