क्या 2014 के मुकाबले 2019 में ज्यादा वोट डाले जाएंगे?

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17 वीं लोक सभा का चुनाव 11 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और यही वो मौका है जब हम भारत के लोग अपने प्रण को पूरा करने का अंतःकरण से प्रयास कर सकते हैं| प्रण का आधार इस प्रकार होना चाहिए कि चाहे जो हो हम इस चुनावी महोत्सव में अपने मताधिकार का उपयोग जरूर करेंगे। आइए हम भारत के लोग मिलकर अपने प्रण को पूरी निष्ठा के साथ पूरा करने का प्रयास करते हैं जिससे भारत अबकी बार 75 प्रतिशत से ज्यादे मतदान कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सके। और साथ ही एक मजबूत सरकार भी बनाए| आज तक जितनी भी सरकारें आई और गयी हम सभी जानते हैं 2014 यानी मोदी सरकार सबसे मजबूत सरकार बनकर सामने आई है, साल 2019 का चुनाव शुरू हो चूका है घर से निकले और भरी मात्रा में वोट दें कर ऐसी ही कोई मजबूत सरकार फिर से बनाए|

भारत में 1952 से लेकर अबतक 16 बार लोक सभा का चुनाव हो चुका है और 17 वीं लोक सभा का चुनाव अप्रैल 11 से मई 19 तक 7 फेजों में होते हुए मई 23 को परिणाम घोषित हो जाएगा। 23 मई को ही तय होगा कि अगले 5 वर्षों तक भारत में किस पार्टी या गठबंधन की सरकार होगी। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा का कहना है कि अबकी बार 90 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे और पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार 8.43 करोड़ मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। इस पूरी प्रक्रिया को पूरी करने के लिए देश भर में मतदान के लिए 10 लाख बूथ बनाए गए हैं| साथ ही इस बार 1.5 करोड़ युवा पहली बार मतदान करेंगे| इनकी उम्र 18 से 19 साल के बीच है|

चुनाव, लोकतंत्र का अहम पक्ष

भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए यह एक विशाल लोकतान्त्रिक महोत्सव है जिसके कर्ता धर्ता हम भारत के लोग हैं। क्या हम भारतवासी अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाते हुए ज्यादा से जायदा मतदान करने का प्रण ले सकते हैं? इसलिए ये जानना जरुरी है कि अबतक भारत के लोक सभा चुनावों में उच्चतम वोटर्स टर्न आउट क्या रहा है? और इन्हीं आंकडों पड़ आधारित हमारा प्रश्न है कि क्या भारत अबकी बार 17 वीं लोक सभा चुनाव में 75 % से ज्यादा मतदान कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा?

सबसे पहले ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर भारत के लोक सभा चुनाव में वोटर्स टर्न आउट को समझने का प्रयास करते हैं क्योंकि भारत का लोकतन्त्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है। सम्पूर्ण विश्व हमारे विशालतम लोकतन्त्र के महोत्सव को टक टकी लगाए देख रहा है कि भारत किस रूप में इस महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न करता है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका कौन निभाता है- हम भारत के लोग | हमें जागरूक होना होगा और ज्यादा से ज्यादा वोट डालना होगा और एक मजबूत सरकार बनानी होगी|

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भारत के इतिहास में 1957 में हुआ सबसे ज्यादा मतदान

अगर वोट परसेंटेज को देखा जाए तो अभी तक का सबसे ज्यादा वोट 1957 में दिया गया था यानि 68.6 प्रतिशत और दूसरा स्थान है 1952 के लोक सभा चुनाव का जिसमें वोटर्स टर्न आउट था 67.6 प्रतिशत। ये वो समय था जब भारत का लोकतन्त्र शिशु काल से गुजर रहा था और भारत उस शिशु रूपी लोकतन्त्र को समझने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन अगर वोट की बार करे तो साल 2014 में भारत ने वोट डालने के मामले में इतिहास रच दिया था| पहले भी इस तरह राजनीतिक भेद था विभेद था लेकिन मकसद सबका एक ही था कि भारत और भारत के लोकतन्त्र को मजबूती के साथ स्थापित करना है। समझने की बात ये है कि उस समय भी भारत के मतदाता अपने लोकतन्त्र के प्रति कितनी निष्ठा रखते थे उसका गवाह है 1952 और 1957 का उच्चतम वोटर्स टर्न आउट|

घटता- बढ़ता रहा है मतदान का प्रतिशत

2014 लोक सभा चुनाव में 66.4 प्रतिशत वोटर्स टर्न आउट था जो कि 1952 और 1957 के बाद वोटर्स टर्न आउट के हिसाब से तीसरे स्थान पर आता है। इस चुनाव को मोदी लहर के रूप में जाना जाता है जिसमें नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं और 1984 के बाद पहली बार कोई एक पार्टी यानि भाजपा स्पस्ट बहुमत के साथ सरकार बनाती है और भाजपा एनडीए सरकार का नेतृत्व करती है।

हम भारत वासियों से आशा करते हैं कि अपने घरों से निकले और वोट डालने जरुर जाए| पिछली बार से ज्यादा वोट और वोट परसेंटेज बढ़ा कर भारत के लोकतंत्र को और मजबूत बनाये और साथ ही एक मजबूत सरकार लाए|