आखिर मेरी दिल्ली में इतनी कड़वाहट क्यो?

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देश की राजधानी को आखिर किसकी नजर लग गई है, जो बीते कुछ हफ्तों से जल रही है। गंगा, यमुना की तहजीब जिस शहर की रगो में भरी होती थी आखिर आज उस शहर में इतनी कड़वाहट का माहौल क्यो बना हुआ है?

दिल्ली वो शहर, जिसकी सुबह चांदनी चौक के गौरी शंकर मंदिर की घंटियों की गूंज से जागती है, तो जामा मजिस्द की इबादत से फुर्ती का अहसास करवाती है। जिसकी शाम गालिब की शायरियों से गुलजार होती है, तो रकाबगंज गुरूद्वारे की गुरूवाणी से मन को आटूट शांति प्रदान करती है। मतलब दुनिया का कोई ऐसा शहर नहीं होगा जहां कि रवायत में इतना गुलकंद मिला हो और आपस में लोगों में भाईचारा हो लेकिन आज ये क्यों सुलग रहा है ये सवाल तो बनता है।

सियासत के नये प्रयोग से झुलस रही है दिल्ली

कुछ लोगो ने सिर्फ अपने फायदे के चलते नजाने कितने घरों में आग लगा दी है, बिना किसी वजह के लोगों को सियासत के चलते उकसाकर आज भाई भाई को दुश्मन बना दिया है। आलम ये है कि दिल्ली के शाहीनबाग में जहां धरने के नाम पर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है, तो नार्थ ईस्ट दिल्ली में विरोध की आग ने शहर को जलाकर रख दिया है। गोकुलपुरी की कार मार्केट की तस्वीर देखकर लगता है कि कैसे देश के दुश्मनों ने सबकुछ स्वाहा कर दिया है। अभी तक 9 लोगों की मौत भी हो गई जिसमें एक पुलिस कॉस्टेबल भी शामिल है। लेकिन इसके बाद भी आग अभी भी जस की तस लगी हुई है।

CAA को आखिर क्यो नही समझ पा रहे

CAA को लेकर सरकार हर तरह से देशवालों को समझने में लगी हुई है। खुद पीएम इस कानून को लेकर खुलकर जनता के बीच में अपना बयान दे चुके है। लेकिन कुछ लोग है जो इस मुद्दे पर समझकर भी नसमझ बनकर एक वर्ग को भड़काने का काम कर रहे है। जिसका असर ये देखा जा रहा है कि दिल्ली सहित देश के कई शहर सुलग रहे है। ऐसे में लगता तो यही है जैसे एक वर्ग सिर्फ इस लिये हंगामा करने के लिये सड़को में उतरी हुई है क्योकि वो मोदी जी की ख्याति से जल रही हो और इस जलन को सड़क पर उतार रही हो। या यू कहे कि इन लोगो ने कसम खा लिया है कि वो देश के संविधान से बने कानून को भी न मानेगे और नही देश की सबसे बड़ी कोर्ट के आदेश को वो तो बस अपना फैसाला संवैधानिक संस्थानो पर थोपना चाहती है। शायद इसीलिये CAA को समझने से इंकार कर रही है और जिसका जन्म ही नही हुआ उस कानून NRC को लेकर सरकार का विरोध कर रही है। ठीक उसी तरह जैसे हिंदी फिल्म बंटी बबली फिल्म में एक दृश्य में दिखाया गया था।

अंत में आग लगाने वाले जो मेरे भाई ही है उनसे सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि आग मत लगाओं अपनी चिलमन में क्योकि ये घर अपना ही है.. समझदार के लिये इशारा काफी होता है, इस लिये दोस्तों फिर से इस शहर को अमन से गुलजार करे जिसके लिये ये पूरे विश्व में जाना जाता है।

 


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