आखिर पीएम मोदी 21 अक्टूबर को लाल किले से झंडा क्यों फहरायेगें?

अगर आप से कोई पूछे कि देश का पहला पीएम कौन है तो आप झट से पंडित नेहरू का नाम लेगें। और ये जवाब भी ठीक है। क्योंकि कुछ सत्ता चापलूस इतिहासकारों ने इतिहास में दर्ज ही यही नाम किया है। लेकिन अब मोदी सरकार देश के इतिहास  के साथ हुई छेड़छाड़ को खत्म कर रही है और आजादी के उस सच को बताने जा रही है, जिसे बहुत ही कम लोग जानते है।

21 अक्टूबर वो दिन जिसको हम अभी तक सिर्फ एक आम दिन की तरह ही जीते आये है क्योंकि इस दिन के इतिहास के बार मे हम कुछ खास जानते ही नही थे लेकिन इतिहास के पन्नो को पलटकर देखे तो 21 अक्टूबर 1943 को ही आजाद हिन्द फौज की स्थापना की थी और देश के महान नेता सुभाष चन्द्र बोस ने इसी दिन भारत को अग्रेंजो से आजाद बताया था। 21 अक्टूबर 2018 को इस ऐतिहासिक घटना के 75 साल पूरे हो रहे हैं। यहां ये भी आपको बता दे कि आजाद भारत की घोषणा करते हुए नेता जी को देश का पहला प्रधानमंत्री भी चुना गया था और सुभाष चन्द बोस ने प्रधानमंत्री के साथ साथ विदेश और रक्षा मंत्री की शपथ ली। जबकि वित्तय मंत्री लेफ्टिनेंट कर्नल एसी चटर्जी, प्रचार मंत्री एस ए अय्यर, प्रमुख सलाहकार रास बिहारी बोस को बनाया गया था।

उस दौरान जापान,फिलिपिस,थाईलैड मंचूरिया जर्मनी और क्रोएशिया ने आजाद हिन्द फौज को मान्यता दे दी थी। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 18 मार्च 1944 को आजाद हिन्द फौज ने भारत के कोहिमा की जमीन पर उतर कर अग्रेंजो के खिलाफ लड़ाई का बिगुल बजा दिया हालाकि हवाई सपोर्ट न मिल पाने और अमेरिका द्वारा जपान पर परमाणु हमला कर देने के कारण नेता जी की फौज कोहिमा तक ही सीमित रह सकी. लेकिन अगर इतिहास को देखे तो पता चलता है कि कैसे आजाद हिन्द फौज के रणबाकुरो ने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिये थे।

लेकिन इसे देश का दुर्भाग्य ही कहेगे कि इतिहास मे इस घटना को कुछ मौकापरस्त इतिहासकारो ने सिर्फ सत्ता मे बैठे एक परिवार के कारण दबा दिया और आजतक हम इस बारे मे अंजान ही बने रहे। लेकिन अब खुद पीएम मोदी ने ऐसे इतिहास से काले पर्दे को हटाने का बीड़ा उठाया जिसके चलते 21 अक्टूबर को पीएम लाल किले से एक बार फिर से झंडा फहराकर महान देश के सपूत नेता जी सुभाष चन्द बोस को सच्ची श्रद्धांजलि तो देंगे ही साथ ही साथ आने वाली पीड़ी को भी ये जानकारी देंगे कि आजादी के लिये देश के हर घर से आवाज उठी थी न कि सिर्फ एक ही परिवार से लोग आजादी के लिये आगे आये थे।