निजीकरण क्यों है जरूरी खुद पीएम मोदी ने जनता को बताया

पिछले 6 सालों से मोदी सरकार पर एक भी दाग नही लगा है जो ये बताता है कि मोदी सरकार एक ईमानदार सरकार है। शायद यही बात कुछ लोगों को पच नही रही है इसलिए वो सरकार को बदनाम करने के लिए देश के बड़े कारोबारियों को मदद पहुंचाने वाली सरकार बोल कर देश में झूठ का किला खड़ा करना चाहते है लेकिन ऐसे लोगों को पीएम मोदी ने करारा जवाब दिया है।

सरकार का काम कारोबार करना नहीं

पीएम मोदी ने एक बिजनेस वेबिनार में देशवासियों को समझाते हुए उन लोगों पर करारा हमला किया है जो सरकार पर कारोबारियों को फायदा पहुंचाने की बात करते है। पीएम मोदी ने बोला कि खराब सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन देते रहने से इकॉनमी पर बोझ पड़ता है। मोदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर आयोजित वेबिनार में कहा कि बजट 2021-22 में भारत को ऊंची बढ़ोतरी की राह पर ले जाने के लिए स्पष्ट रूपरेखा बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है। उन्होंने कहा व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं,  सरकार का ध्यान जन कल्याण पर होना चाहिए। सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हुआ है या बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों को बाजार में चढ़ाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाये जाएंगे।

निजीकरण से बढ़ते हैं रोजगार के मौके

पीएम ने कहा कि सरकार को बिजनस करने से कई नुकसान होते हैं और उनकी भरपाई के बारे में भी उसे सोचना पड़ता है। सरकारें ये सोचती आई हैं कि जो जैसा चल रहा है चलने दो, आने वाली सरकारें इससे निपटेंगी और ये हमेशा से चलता ही आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब इससे बाहर निकलना होगा, क्योंकि जब निजीकरण बढ़ता है तो आधुनिकता बढ़ती है, बिजनस का विस्तार होता है, बेहतर प्रबंधन बनता है और इन सब के चलते देश में रोजगार के नए मौके आते हैं। लाखो लोगों की जरूरत पूरी होती है। इसके साथ साथ उन्होने बोला कि नये भारत में सिर्फ पेट भरने के लिये कारोबार हो ये मुमकिन नही है देस को तेज चलता होगा कुछ नया करना होगा। इसके लिये सरकार आम लोगों को आर्थिक मदद तो कर सकती है लेकिन इसे सफल बनाना जनता और कारोबारियों का ही काम होगा फिर वो छोटा हो या बड़ा।

एक तरह से सरल शब्द में पीएम मोदी ने देस को ये समझाने की कोशिश की है कि देस में निजीकरण की कितनी जरूरत है क्योंकि इसी के दम पर कई देश आज हमारे देश से बहुत आगे खड़े है लेकिन अब भारत भी तेजी के साथ आगे बढ़ना चाहता है इस लिये वो भी नई सोच के साथ ..