एक यक्ष प्रश्न, विपक्ष को ज्यादा काम से दिक्कत क्यों होती है ?

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जब से केंद्र में पीएम मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार आई है, तब से लगातार संसद के कामकाज में कोई न कोई नया रेकॉर्ड बनता ही रहता है। 2019 में बंपर जीत के बाद संसद के पहले सत्र में रेकॉर्ड कामकाज होने से उत्साहित सरकार ताजा सत्र में भी ज्यादा से ज्यादा काम करने की इच्छा जता रही है। लेकिन सरकार के इस काम पर भी रोड़ा विपक्ष अटकाते हुए दिख रहा है। 

आखिर विपक्ष काम करने से मुंह क्यों चुराता है?

जब से मोदी 2.0 की शुरूआत हुई है, तब से ही मोदी सरकार के कामकाज की स्पीड चौथे गेयर में देखि जा रही है। सरकार का कोई भी मंत्रालय हो सब कम वक्त में ज्यादा काम करने के लिये आतुर हैं। सभी मंत्री भी अपने अपने दफ्तर में देर रात तक काम करते हुए देखे भी जा रहे हैं।

इसी सिलसिले में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शनिवार और रविवार को भी सत्र चालू रखने की पेशकश की और उन्होंने सांसदों से पूछा कि क्या वो परंपरागत तौर पर छुट्टी के दिन शनिवार और रविवार को भी चर्चा को तैयार हैं? जिसपर विपक्ष ने जोरदार तरीके से असहमती जताई, जिसके बाद लोकसभा स्पीकर चुप दिखे, हालाकि सत्ता पक्ष से सदन को चालू रखने के लिए आवाज आई, फिर भी लोकसभा स्पीकर ने कहा कि वो बिना आम सहमति से ये कदम नही उठाएंगे, फिर इसपर सहमति बनी कि रेल बजट पर आज गुरुवार और कल शुक्रवार को देर रात तक चर्चा होगी। लेकिन सवाल ये खड़ा होता है, कि विपक्ष आखिर काम से जी क्यों चुराता है खुद विपक्ष लोकसभा के सदन में हंगामा करके संदन का वक्त खराब करते हैं और सरकार जब खराब वक्त की भऱपाई करने की बात करती है तो क्यों उसमें रोड़े अटकाते हैं, क्या विपक्ष के लिए  देशहित के लिए काम करने से ज्यादा अवकाश जरूरी है; ये बात जनता के सामने निकलकर आ गई है। और ये यक्ष प्रश्न अब जनता विपक्ष से जरूर सड़को पर पूछेगी कि आप क्यों काम से जी चुराते हैं।

सदन में हर दिन बना इतिहास

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि 6 अनुदान मांगों पर चर्चा बाकी है जिसे जल्द से जल्द अध्यक्ष पास करना चाहते हैं , ऐसे जब से ओम बिडला स्पीकर बने हैं तब से ही लोकसभा में लगातार ऐसे काम हो रहे हैं जो इतिहास बना रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डाले तो 17वीं लोकसभा के साथ मोदी सरकार के शुरू हुए दूसरे कार्यकाल के पहले संसद सत्र में लोकसभा ने 120% प्रोडक्टिविटी के साथ 20 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया था। संसदीय गतिविधियों पर शोध करने वाली एजेंसी पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने बताया था कि 16 जुलाई, 2019 तक लोकसभा की उत्पाकदता 128% रही थी जो 20 वर्षों के दौरान किसी भी सत्र के मुकाबले सबसे ज्यादा है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी 2014 के शीत सत्र और 2016 में बजट सत्र की उत्पादकता सराहनीय स्तर पर थी। 

ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या विपक्ष संसद में हल्ला मचाने के लिए ही जाता है और उसे देशहित के कामो की कोई परवाह नही है।


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