सवाल तो बनता है: विपक्ष और देश के दुश्मनों के सुर एक क्यो?

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पुलवामा हमले पर विपक्ष जब मोदी सरकार से सवाल करती है, तो ये क्यो लगता है, कि जैसे चेहरा विपक्ष का है लेकिन सवाल पाकिस्तान का? विपक्ष विरोध करते करते क्यो इतना गिर जाती है, कि वो दुश्मन देश को मदद करने लगता है जबकि भारत पुलवामा में शहीद हुए जवानों का बदला दुश्मन देश से ले चुका है? जिसके बाद अब दुश्मन मुल्क पाकिस्तान भी भारत में आंतक फैलाने से पहले दस बार सोचने लगा है। लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर किस मंशा से फिर ऐसे सवाल पूछे जाते है?

देश का विपक्ष या पाक की पीआर एजेंसी

पुलवामा मसले के बहाने विपक्ष ने सरकार पर फिर से हमला किया है। वैसे देखा जाये तो विपक्ष के हमले में धार वही पुरानी ही नजर आ रही है। विपक्ष ने पुलवामा हमले को लेकर हिन्दू मुस्लिम कार्ड खेला है। विपक्ष के एक बड़े नेता ने आरोप लगाया और एक के बाद एक तीन ट्वीट किये जिसमें मोदी सरकार पर सवालों की बौछार करते हुए लिखा, अगर देवेंद्र सिंह मूल रूप से देवेंद्र खान होते तो अभी आरएसएस और मोदी सरकार के चाहने वाले जोरदार हल्ला मचाने लगते। साथ ही पुलवामा हमले पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते पूछा गया कि देवेंद्र सिंह उस वक्त वहां के अधिकारी थे तो कही इनके जरिये ही हथियार या विस्फोटक को वहा तक पहुंचाया गया था. ऐसे कई सवाल है जिसका जवाब आखिर सरकार क्यो नही देती। गौरतलब है कि डीएसपी सिंह को पुलिस ने दो आतंवादियों के साथ गिरफ्तार किया था। बस क्या था विपक्ष को मौका मिल गया हिन्दू मुस्लिम कार्ड खेलने का और ये बताने का कि हिन्दू लोगो भी आतंकी हो सकते है, केवल मुसलमान ही नही। यहां देखने वाली बात ये है, कि आखिर विपक्ष पुलवामा हमले के पीछे किसका हाथ बताने में जुटी हुई है? क्या उसे इस बात का अभी भी विश्वास नही है, कि पुलवामा हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी।

पाक को मदद पहुंचाने में आगे विपक्ष

ऐसा नही कि ये पहली बार हुआ है, इसके पहले भी ऐसा हो चुका है, जब मोदी विरोध के चलते विपक्ष देश का विरोध करने लगा। ऐसे ही धारा 370 हटने के बाद जब पाकिस्तान ये भ्रम फैला रहा था, कि कश्मीर में सबकुछ ठीक नही है और वहाँ मुसलमानों को दबाया जा रहा है। विपक्ष के कुछ नेताओं भी पाक के इस बयान के साथ खड़े दिखे। तो खुद पाक ने यूएन में भारत के कई बड़े नेताओं के बयान पेश करके कश्मीर मसले को लटकाने की कोशिश की। लेकिन इसके बावजूद भी विपक्ष अपनी बातो को और पाकिस्तान के बयानों के साथ खड़ा दिख रहा था और आज भी देश का विपक्ष  मोदी विरोध में और सत्ता को हासिल करने के लिए कुछ भी करने और बोलने में जुटा हुआ है। वो ये नही देख रहा है, कि मोदी विरोध के चलते वो आज की तारीख में देश का विरोध करने लगा है जिससे दुश्मन मुल्क को मदद मिल रही है। विपक्ष का आज इस कदर पतन हो गया है, कि वो देश की सेना पर भी विश्वास नही कर रही है। इसका जीता जागता साबूत इस बात से लगाया जाता है, कि आज भी विपक्ष सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत चाहती है तो सेना के अधिकारियों को समय समय पर गलतबयानबाजी के जरिये अनाप शनाप बकती भी है। इससे विपक्ष का असल रूप समझ में आता है।

बरहाल अगर विपक्ष की आज की भूमिका पर नजर डाले तो यही लगता है, कि विपक्ष सिर्फ देश में माहौल बिगाड़ने और हिन्दू मुस्लिम के साथ साथ धर्म की सियासत करके सत्ता में लौटना चाहती है, तभी तो बिना मुद्दे के ही वो मुद्दा बनाने में जुटी रहती है। मसलन धारा 370 हो या फिर CAA हो देश में माहौल खराब करने में आज विपक्ष अहम रोल अदा कर रही है जिसके चलते दुश्मनों की मदद वो करती हुई दिखाई देती है। ऐसे में विपक्ष को मोदी सरकार का विरोध करने से पहले ये जरूर जान लेना चाहिये, कि अगर एक अंगुली आप किसी पर उठाते हो, तो चार अंगुली आप की तरफ उठती है। जो आपकी सियासत की हकीकत जनता के सामने बया कर देती है।


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