संसद से पास हुआ फिर कानून बना; ऐसे में विरोध क्यो?

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Why is there such opposition?

नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया। राज्यसभा में पक्ष में 125 और विपक्ष में 99 वोट पड़े। वैसे ही संसद में पारित होकर ही धारा 370 और तीन तलाक का भी कानून बना।

नागरिकता संशोधन विधेयक भारी विरोध के माहौल के बीच एक कानून बन गया है। राष्ट्रपति ने इसे अपनी स्वीकृति दे दी और इसे अधिसूचित भी कर दिया गया है। लेकिन कई तबकों में इसका विरोध जारी है। दिल्ली, अलीगढ़, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई समेत कई शहरों में नए कानून के विरोध में रैलियां निकाली गईं। सबसे भारी विरोध पूर्वोत्तर के राज्यों में हो रहा है।असम, त्रिपुरा, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में कानून के विरोध के बाद इतनी अशांति फैल गई कि जगह जगह कर्फ्यू लग गया और सेना तैनात कर दी गई।

मुस्लिम समाज की जनता में बड़ी संख्या में यह धारणा बन रही है कि ये कानून ठीक नहीं है। उनके बिच कुछ लोग अपने फायदे के लिए इस कानून के लेकर भ्रम फैला रहे है।

क्या नागरिकता संशोधन बिल 2019 संविधान का उल्लंघन है?

सरकार और बिल के विरोध में खड़े लोग संविधान के सहारे बिल और सरकार का विरोध कर रहे हैं. विरोधियों का कहना है कि सरकार संविधान की भावना को तार-तार कर बिल में संशोधन कर रही है। लेकिन जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों ने लोकसभा और राज्यसभा में अपना बहुमत देकर इस विधेयक को पास किया है फिर ये कैसे सविधान का उल्लंघन हो सकता है? जब कोई कानून संसद द्वारा पारित और राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित होकर बना है तो कैसे वो असंवेधानिक हो सकता है ? तो फिर इस तरह तो ये साफ है कि अगर कोई भी व्यक्ति जो यह कह रहा है कि नागरिकता संशोधन बिल 2019 से संविधान का उल्लंघन हो रहा है या संविधान की भावना का हनन हो रहा है, तो यहां सिर्फ और सिर्फ बरगलाने और विरोध जताने का तरीका ही माना जा सकता है। बात में कोई दम नज़र नहीं आता।

क्या नागरिकता बिल से भारत के लोगों का कोई नुकसान है?

नागरिकता संशोधन बिल 2019 भारतीयों के लिए नहीं है, बल्कि ये उन लोगों के लिए है जो भारतीय होने की इच्छा पाले हिंदुस्तान में बैठे हुए हैं, ऐसे में इस बात को समझने में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए कि इस बिल से हम भारतीयों को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस बिल के कानून बनने से ना तो किसी भारतीय की नागरिकता जाएगी और नहीं किसी को नागरिकता का कोई विशेष अधिकार मिलेगा या छिनेगा। ऐसे में अगर बिल का विरोध करते-करते अगर कोई देश के लोगों को डराता है तो उसकी अपनी मंशा या महत्वकांक्षा हो सकती है। इससे किसी को डरने की जरूरत नहीं है।

क्या मुस्लिम को बरगलाया जा रहा है?

इस बिल से किसी मुस्लिम का हित या हक़ नहीं मर रहा है ना उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। क्योंकि यह बिल उन बाहरी देशों के लोगों के लिए है जो भारत के हैं ही नहीं फिर अगर कोई ये कहता है कि इस बिल से भारत के मुस्लिमों की उपेक्षा या देश को हिंदू-मुस्लिम में बांटने की कोशिश हो रही है तो माना जा सकता है कि वो अपने हित के लिए देश के लोगों खासतौर से मुस्लिमों को बरगला रहा है।

इस बिल से किसी भारतीय का हित या अहित नहीं होने जा रहा है. बल्कि बाहर से आए लोगों का हित या अहित होगा। कुछ राजनीतिक पार्टियां अपने वोट बैंक का जुगाड़ में इस बिल में मुस्लिमों को शामिल करने की बात कर रहे हैं तथा भ्रम और डर का माहौल पैदा करना चाह रहे है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक पारित करा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान तीनों देशों के अल्पमत समुदायों जिनको धर्म के आधार पर पीडि़त किया जा रहा है को राहत देने का कार्य ही किया है। इससे भारतीय नागरिकों के हितों पर कोई कुप्रभाव नहीं पडऩे वाला। इसलिए यह बेवजह का विरोध बंद होना चाहिए।


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