राष्ट्र विरोधी दिशा रवि की गिरफ्तारी पर अब हंगामा क्यो ?

‘वो गजल है न , बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी’ सब ये पूछे की कि तुम इतनी परेशान क्यो हो.. जब से टूलकिट मामले में क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि की गिरफ़्तारी हुई है तब से कुछ लोगों का हाल यही हो रहा है। चलिए आज हम उनकी परेशानी का सबब आपको बताते हैं जो इस गिरफ्तारी से विचलित है।

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दिशा रवि पर क्या हैं आरोप

पुलिस ने आरोप लगाया कि भारत के खिलाफ वैमनस्य फैलाने के लिए दिशा रवि और अन्य ने खालिस्तान-समर्थक समूह ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ के साथ साठगांठ की। पुलिस ने बताया कि ग्रेटा थनबर्ग  के साथ टूलकिट साझा करने वालों में से दिशा रवि भी एक थीं। पुलिस के मुताबिक रवि को उनके घर से हिरासत में लिया गया और बाद में ‘टूलकिट’ बनाने के साथ उसके प्रचार-प्रसार में शामिल होने  के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इतना ही नहीं रिपब्लिक डे के पहले एक जूम मीटिंग हुई थी, जिसमें एमओ धालीवाल, निकिता और दिशा के अलावा अन्य लोग शामिल हुए थे। एमओ धालीवाल मुद्दे को बड़ा बनाना चाहता था और उसका मकसद था कि किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाई जाए। यहां तक कि एक किसान की मौत को पुलिस की गोली से हुई मौत बताया गया। 26 जनवरी की हिंसा के बाद अंतरराष्ट्रीय सेलिब्रिटी और एक्टिविस्ट से संपर्क किया गय। दिशा रवि पहले से ग्रेटा थनबर्ग को जानती थीं, इसलिए उनकी मदद ली गई

दिशा रवि की गिरफ्तारी से कुछ लोग क्यो है परेशान

किसान आंदोलन के दौरान जिस तरह से दिल्ली में कुछ लोगों ने किसान के नाम पर हंगामा किया अब उससे धीरे धीरे पर्दा उठने लगा है। साफ हो रहा है कि किसान आंदोलन के पीछे किसका का हाथ है जिसकी शुरूआत दिशा रवि की गिरफ्तारी से हो गई है। हालांकि इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही कुछ लोग इसे मोदी सरकार की तानाशाही बताने लगे है, कुछ लोग तो ये बोल रहे हैं कि 21 साल की लड़की पर जुर्म किया जा रहा है और वो ऐसा बोल रहे है कि अगर इस लड़की अपना मुंह खोल दिया तो साफ हो जायेगा कि विदेश सुनियोजित इस प्रदर्शन को देश में बैठे कौन कौन लोग हवा दे रहे थे। वैसे 26 जनवरी से पहले ये लोग छुपकर काम कर रहे थे लेकिन अब तो खुलकर कुछ मोदी विरोधी और देश की पार्टिया बोल रही है कि ये आंदोलन उनका ही है जिससे साफ हो जाता है कि सरकार को बदनाम करने के लिए ही ऐसा हंगामा रचा गया था।

ऐसा पहली बार नही हुआ है इससे पहले भी भीमा कोरेगांव में गिरफ्तारी हो या फिर CAA  में दंगा करने वालों पर कार्यवाही, कुछ लोग उनके साथ खड़े होकर सरकार को तानाशाही करने का आरोप लगाने लगते हैं। वो शायद भूल जाते हैं कि ऐसे लोगो का साथ देने के चलते ही दूसरे लोगों को बल मिलता है और वो दूसरी घटना को अंजाम देने की रणनीति बनाते है।