NEET और JEE परीक्षा आखिर क्यों जरूरी है?

मेडिकल और इंजीनियरिंग कोर्स में नामांकन के लिए सितम्बर में होने वाली परीक्षा NEET और JEE  को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा के आयोजन की इजाजत दे दी है‚ इसके बावजूद सड़को पर इस परीक्षा को लेकर सियासत देखी जा रही है। हालाकि ये बिलकुल नही सोचा जा रहा है कि अगर परीक्षा टल जाती है तो इससे देश के साथ साथ युवा पीढ़ी को कितना भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। चलिये आज हम आपको बताते है, कि आखिर क्यो ये परीक्षा होनी चाहिए ?

लाखों छात्रों के भविष्य के लिए

बेशक‚ कोरोना के कारण परीक्षा का आयोजन चुनौतीपूर्ण कार्य है। छात्रों को मोटर–गाडी के अभाव और बाढ के कारण आने–जाने की समस्या होगी‚ तो ठहरने के लिए सुविधा का अभाव भी होगा। परीक्षा केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग अलग चुनौती होगी। लेकिन इस आधार पर परीक्षा का आयोजन रोक देना कहां तक सही होगाॽ ऐसे में अब केवल  दो विकल्प ही बचते है, एक तो कोरोना के सामने घुटने टेक दें या जीवन को गति प्रदान करें। नहीं पता कि कोरोना संकट कब खत्म होगा। न भूलें कि स्पेनिश फ्लू को खत्म होने में दो वर्ष लगे थे। अगर परीक्षा नहीं होगी‚ तो छात्रों का बहुमूल्य एक साल बर्बाद हो जाएगा। अभी करीब 25 लाख छात्रों का भविष्य कसौटी पर है‚ तो अगले साल नया बैच आ जाएगा। वही इस परीक्षा को लेकर करीब 80 फीसदी छात्रों ने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिया है । ऐसे में महज विरोध के लिये बच्चों के भविष्य का मजाक नही बनाया जा सकता है। इसके साथ कई ऐसे बच्चे भी होगे तो ये परीक्षा उम्र के लिहाज से आखरी बार दे रहे होंगे। अगर  पेपर नही होते है तो सबसे ज्यादा नुकसान उन बच्चों का ही होगा जो नये साल में इस परीक्षा में बैठ ही नही पाएंगे।

सरकार ने कर ली है फुल प्रुफ तैयारी

वही दूसरी तरफ सरकार ने कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा करवाने की जोर शोर तैयारी कर ली है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए परीक्षा आयोजन के लिए तैयारी में लगी है। इसने परीक्षा केंद्रों की संख्या बढा दी है‚ जिससे शहर और केंद्र के हिसाब से छात्रों की औसत संख्या पहले की अपेक्षा कम होगी। राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर इस तैयारी में हाथ बंटाएं तो कोरोना के खिलाफ लडाई में राष्ट्र की सामूहिक इच्छाशक्ति की अभिव्यक्ति ही होगी। इतना ही नही जिन जगहो पर परीक्षा केंद्र बनाये जा रहे है वहां कोरोना काल की तरह हर कर्मचारी मुस्तैद दिखे तो क्यो न हम परीक्षा आराम से हो सकेगी। इसके साथ साथ हर सेंटर में महज 1000 बच्चों की व्यवस्था की जा रही है जो एक बेहतर कदम होगा।

 

बेशक‚  लोकतंत्र में सरकार के निर्णय की आलोचना करे‚ लेकिन विरोध केवल विरोध के लिए हो‚ तो वह अपनी अहमियत खो देता है। जैसे कि इस परीक्षा पर हो रहा हंगामे को देख कर लगता है। इससे यही लग रहा है कि छात्रों के नाम पर बस राजनीति हो रही है।