पीएम मोदी ने आखिर क्यो बोला राजस्थान के सीएम गहलोत को धन्यवाद

सियासत में कहते है कि अगर वाक्-पटुता आपको नहीं आती तो फिर सियासत आपके बस की बात नहीं, क्योंकि इसी के जरिये ही नेता जहां एक दूसरे पर प्रहार करते है, तो आम जनता का दिल जीतते है। वाक्-पटुता से ही बड़े बड़े कूटनीति हल निकाले जाते है और वाक्-पटुता के मामले में पीएम मोदी को आज का बादशाह कहा जाये तो गलत नहीं होगा क्योंकि पीएम मोदी अपनी वाक्-पटुता के जरिये ऐसी चोट करते है जिससे नेता चारो खाने चित हो जाते है। ऐसी ही एक बानगी उस वक्त देखने को मिली जब पीएम मोदी राजस्थान में 4 अस्पताल का शिलान्यास कर रहे थे। सीएम गहलोत ने पीएम मोदी को काम की लंबी लिस्ट थमा दी जिसके बाद पीएम मोदी ने ऐसा करारा जवाब दिया जो शायद ही गहलोत साहब भूल सके।

भरोसे के लिये पीएम मोदी ने किया धन्यवाद

वैसे तो पीएम मोदी की हाजिर जवाबी का कौन नहीं कायल है लेकिन आज उसका एक उदाहरण और देखने को मिला अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री का धन्यवाद भी किया और कहा, ‘जब मैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बातों को सुन रहा था तो उन्होंने कामों की एक लंबी सूची गिना दी। मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री का धन्यवाद करता हूं कि उनका मुझपर इतना भरोसा है और लोकतंत्र में यही बड़ी ताकत है। उनकी विचारधारा और पार्टी अलग है और मेरी अलग। लेकिन अशोक गहलोत का मुझपर जो भरोसा है, उसी के कारण आज उन्होंने दिल खोलकर बातें रखीं हैं। ये दोस्ती लोकतंत्र की ताकत है।’ यानी पीएम मोदी ने एक तीर से दो शिकार करते हुए कांग्रेस पर हमला किया तो अपने ऊपर लोकतंत्र को ना मामने के आरोप को भी उन्होने गलत साबित कर दिया और ये विश्वास दिलाया कि देश में लोकतंत्र लगातार मजबूत होता जा रहा है।

हेल्थ सेक्टर की जो कमियों को दूर करने का काम जारी

पीएम मोदी ने कहा, मेडिकल शिक्षा के मामले में बीते दो दशक के अथक प्रयासों से गुजरात ने मेडिकल सीटों में लगभग 6 गुना वृद्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री के रूप में देश के हेल्थ सेक्टर की जो कमियां मुझे अनुभव होती थीं, बीते 6-7 सालों से उनको दूर करने की निरंतर कोशिश की जा रही है। देश के स्वास्थ्य सेक्टर को ट्रांसफॉर्म करने के लिए हमने एक राष्ट्रीय अप्रोच, एक नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पर काम किया। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर आयुष्मान भारत और अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तक, ऐसे अनेक प्रयास इसी का हिस्सा है। चाहे एम्स हो, मेडिकल कॉलेज हो या फिर एम्स जैसे सुपर स्पेशियल्टी अस्पताल हों, इनका नेटवर्क देश के कोने-कोने तक तेजी से फैलाना बहुत जरूरी है। आज हम संतोष के साथ कह सकते हैं कि 6 एम्स से आगे बढ़कर आज भारत 22 से ज्यादा एम्स के सशक्त नेटवर्क की तरफ बढ़ रहा है।

ये कहना गलत नहीं होगा कि पिछले 7 सालों में जिस तरह से हेल्थ सेक्टर में तेजी से काम हुआ है। अगर आजादी के बाद यही स्पीड रहती तो भारत आज एक हेल्थ सेक्टर में बहुत आगे होता लेकिन सियासत के चलते सिर्फ मसले लटके रहे। लेकिन अब ऐसा नही है तभी तो आये दिन सुनाई देता है कि आज इस राज्य में अस्पताल की शुरूआत हुई तो आज दूसरे राज्य में अस्पताल बनकर तैयार है।