चीन क्यों अपना रहा है अंतिम संस्कार के लिए दाह संस्कार की विधि

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दुनिया भर में अंतिम संस्कार के लिए कई सारी विधियाँ है, जिनमे भारत में हिन्दू रीती-रिवाज़ के अनुसार मृत शवों का दाह संस्कार करना अर्थात शवों को जलाने की परंपरा है। इसके अतिरिक्त ईसाइयत और इस्लाम में शवों को जमीन में गाड़ने की विधि है।

तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस की दहशत से खौफजदा चीन मृत शवों के लिए नित नए निर्देश जारी कर रहा है। चीन ने रविवार को Coronavirus को फैलने से रोकने के लिए इसके संक्रमण से मरने वालों को दफनाने पर रोक लगा दी है। चीन ने शवों के अंतिम संस्कार के लिए शवों को जलाने की विधि को ही सबसे बढ़िया बताया है, चीन ने बताया है की शवों को गाड़ने से बीमारियाँ फैलती है। चीनी सरकार ने घोषणा की है की – क्रोना वायरस से पीड़ित जितने लोगो की मौत हुई है उन सभी के शवों को गाड़कर अंतिम संस्कार नहीं किया जायेगा बल्कि सभी के शवों को जलाकर ही अंतिम संस्कार किया जायेगा ।

चीन ने इसके पीछे कारण भी बताया है – चीन ने बताया की अगर शवों को जमीन में दफना देंगे तो उनके शरीर में जो क्रोना वायरस या अन्य बैक्टीरिया या वायरस है वो जमीन में मिल जायेगा और ये वायरस और बैक्टीरिया कभी नष्ट नहीं होगा बल्कि जमीन से फैलेगा ।

समाचार एजेंसी आइएएनएस ने Efe news के हवाले से बताया है कि प्रशासन ने अंतिम दर्शन कार्यक्रम जैसी परंपराओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (National Health Commission), नागरिक मामलों के मंत्रालय एवं जन सुरक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश में कहा गया है कि शवों का अंतिम संस्कार उनके स्थान के नजदीक के शवदाह गृहों में कराया जाए। कोरोना वायरस से मरने वालों के शवों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में नहीं ले जाया जा सकता है। ना तो ऐसे शवों को दफनाया जा सकता है ना ही अन्य साधनों से इन्हें संरक्षित नहीं किया जा सकता है।

समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट में कहा गया है कि शवों को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सीलबंद बैग में रखना चाहिए जिसको बाद में खोला न जा सके। जारी दिशा निर्देशों में कहा गया है कि शवों को लाने के लिए शवदाह गृहों द्वारा कर्मी और वाहन भी भेजे जाने चाहिए और उसका मार्ग पहले से तय होना चाहिए ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। मालूम हो कि चीन में इस वायरस के संक्रमण से 304 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 14 हजार से ज्याकदा लोग संक्रमित हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सेना के 1,400 डॉक्टर एक हजार बिस्तरों वाले फायर गॉड माउंटेन नाम के इस अस्पताल में विषाणु से संक्रमित लोगों का इलाज करेंगे। यह अस्पताल उन दो अस्थायी अस्पतालों में से एक है जिन्हें वुहान के मरीजों की अधिकता को देखते हुए बनाया गया है। दूसरे अस्पताल का नाम थंडर गॉड माउंटेन रखा गया है जिसमें 1,600 बिस्तरों की सुविधा होगी।

 


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