अहंकार का नाश करने वाले भगवान हनुमान जी पर ही अहंकारी सियासत क्यों ?

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।

हनुमान चालीसा की इस चौपाई का मतलब है कि जो हनुमान चालीसा पढ़ता है उसका संकट दूर हो जाता है। लेकिन इसके बावजूद आज हिंदुस्तान में हनुमान चालीसा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। खासकर महाराष्ट्र में जहां इस मुद्दे पर नए नए नेताओं के विवादित बयान आ रहे है जिसे सुनकर लगता है कि आखिर ऐसा भारत में क्यों हो रहा है।

 

हनुमान तो सबके है फिर विवाद क्यों ?

सच में कलयुग का प्रभाव आज के वक्त बहुत अधिक बढ़ चुका है तभी तो राम भक्त हनुमान जी पर सियासी लड़ाई खूब देखने को मिल रही है। अच्छा मजे की बात ये है कि दोनो पक्ष भगवान हनुमान पर सियासत भी कर रहे है और अपने आपको हनुमान भक्त बताने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे है। जबकि हनुमान जी हमें यही शिक्षा देते है कि कभी भी अहंकार मत करना चाहिये भगवान राम के सबसे बड़े भक्त होने के बाद भी वो हमेशा अपने आपको सबसे छोटा मानते थे। लेकिन आज कलयुग में बयान आ रहे है कि हमारी भक्ती तुमारी भक्ती से बड़ी है। ये अहंकार ही तो है कि हम हनुमान जी की आरती नहीं होने देंगे। अगर हनुमान आरती हो जाये तो क्या ये मुद्दा थम नहीं जाता लेकिन सत्ता में बैठे कुछ लोग कुछ वोट के चलते हनुमान जी को छोटा आंक रहे है तो कुछ लोग हनुमान चालीसा के जरिये सत्ता के करीब आने का सपना देख रहे है। जबकि वो लोग ये भूल गये है कि चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा! यानी आपका यश चारों युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग) में फैला हुआ है, सम्पूर्ण संसार में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान हैं।

देश में माहौल बिगाड़ने की साजिश तो नहीं

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा। यानी जो हनुमान जी की चालीसा पढ़ता है उसकी हर इच्छा पूरी होती है और ये बात वो लोग भी जानते है जो आज हनुमान चालीसा पर लेकर विवाद खड़ा कर रहे है। लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर इश तरह का विवाद भारत में क्यों होता है। इसका सीधा सा कारण यही है कि केंद्र में बैठे मोदी सरकार के विरोध में आज विपक्ष को कोई ठोस मुद्दे नही मिल पा रहे है जिसके चलते वो या तो झूठे मुद्दे बनाकर सियासत चमकाना चाह रहे है या फिर देश में धार्मिक उन्माद पैदा करके मोदी सरकार के विकास की गति को रोकना चाह रहे है और इसी वजह से इस तरह के बिन सिर पैर के मुद्दे खड़े हो रहे है।

इसके पीछे एक बात ये भी देखी जा रही है कि ऐसे मुद्दे उन राज्यों में ही आ रहे है जहां बीजेपी की सरकार नहीं है। हां, एमपी और गुजरात इस बाबत अपवाद है। लेकिन यहां ये कह सकते है कि जैसे कोरोना की दूसरी लहर में इन राज्यों ने देश का माहौल खराब किया था ठीक वैसे ही ये राज्य धार्मिक उन्माद पैदा करने में जुट गये है और जनता को इस बात से बेखबर नही रहना चाहिये।

बाकी जो लोग आज हनुमान चालीसा पर मुंह फेर रहे है उनको बस यही कहना चाहूंगा कि हनुमान चालिसा में लिखा है कि जो हनुमान जी आराधना करता है उसकी सारी दिक्कते दूर हो जाती है