ये ‘बापू’ कौन हैं?

हाँ, बड़ी मासूमियत के साथ मुन्ना यह पूछ रहा था अपनी माँ ‘धनिया’ से. 6 साल का मुन्ना तो यही जानता था कि उसके ‘बापू’ दिल्ली में नौकरी करते हैं जो दिवाली या होली में घर आते हैं. अपने सवाल से खुद मुन्ना परेशान था कि यह आज नया ‘बापू’ कौन आ गया जिसके बारे में रेडियो में बोला जा रहा है. धनिया ने बताया कि यह उसके वाले बापू नहीं हैं, ये कोई और हैं जिनका नाम उसने भी बचपन में अपनी किताबों में पढ़ी थी. चौथी क्लास तक पढ़ी धनिया इतना जानती थी कि ये बापू कोई महात्मा थे जिसने कोई जादू किया था बिना खून बहाए और अँगरेज़ भारत से रातो-रातो भाग गए थे.

मुन्ना को इतना तो समझ में आ गया था कि यह उसके वाले बापू नहीं हैं, वह इतना भी समझ गया था कि ये बापू कोई जादूगर थे. बस उसकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए काफी था. फिर मुन्ना निकल गया उछलते-कूदते घर से बाहर. टोली का जमावड़ा देख वो भी शामिल हो गया अपने दोस्तों के साथ. भीड़ में बड़ी-बड़ी आँखें लिए मासूमियत से उसने लंगोटिया इयार ‘छोटू’ के कान में उसी जादूगर का नाम बताया जो अभी सुन कर आया था. छोटू भी सुन रहा था सुबह से वही नाम.

“अरे, आज इसीलिए तो स्कूल में छुट्टी है” छोटू ने मुन्ना की तरफ देखते हुए मुन्ना को एक बुजुर्ग का तस्वीर दिखाया जिसमें वो बुजुर्ग धोती पहन कर उसी को ओढ़े हुए थे और हाथ में लाठी थी.

“यह जादू लाठी से करते थे क्या?” मुन्ना ने फोटो को घूरते हुए पूछा

“लगता तो यही है, लेकिन लगता है उनके पास भी कपड़ा नहीं था पहनने को”

कहीं ना कहीं मुन्ना और छोटू बापू के लाठी और धोती में फंस गए थे. उनके दिमाग के किसी कोने में दूसरा जादूगर था जो उन्होंने दशहरा के मेला में देखा था. लेकिन उसने हैट लगा रखी थी और कपडे भी अच्छे पहन रखे थे.

दोनों सोच ही रहे थे कि उन्हें गाँव के एक बुजुर्ग हाथ में लोटा लिए, धोती पहने और दुसरे हाथ में लाठी लिए खेत से आते दिख गए. मुन्ना ने फोटो दिखाते पूछा – “ बाबा ये बापू कौन हैं जो जादूगर थे?” बुजुर्ग मुस्कुराते हुए प्यार से उनको अपने साथ ले गए . तभी छोटू मुन्ना के कान फुसफुसाता है “ अरे लाठी और धोती तो बाबा के पास भी हैं” मुन्ना ने सोचते हुए धीरे से बोला “ लेकिन बापू के हाथ में लोटा तो नहीं है ना”. बाबा उनकी परेशानी को समझ रहे थे लेकिन खुद भी परेशान थे, कारण था वह लोटा. फिर बाबा ने उन्हें बताना शुरू किया “ बापू बहुत बड़े वकील थे, विदेश में उनको अंग्रेजों ने अपमान किया था तो भारत आ कर भारत माँ को गुलामी से मुक्त कराने में लग गए. भारत में गरीबी थी तो उन्होंने भी विदेशी कपड़ों का बहिष्कार कर चरखा के सूत से बने धोती पहनने लगे. सत्य और अहिंसा से उन्होंने अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया. वो हमेशा स्वच्छता में विश्वास रखते थे और लोगों से गन्दगी से दूर रहने को कहते थे ”

 

मुन्ना का नटखट मन तो बाबा के लोटा पर अटका था. जब रहा ना गया तो मुन्ना ने पूछ लिया “ बाबा आप तो बहुत जानते हो बापू के बारे में, लाठी भी है और धोती भी, लेकिन लोटा से स्वच्छता कैसे फैला रहे थे आप?”

 

अब बाबा जो खुले में शौच कर के आ रहे थे उनका गला सूख गया, बोले “ बेटा, यह मेऋ आदत ख़राब हो गयी है बहार जा कर शौच करने का, बापू होते तो उसी लाठी से मेरी पिटाई करते.”

 

बाबा के यह बात सुन कर दोनों बच्चे खिलखिला पड़े. अब उन्हें उस जादूगर का धोती और लाठी दोनों का मतलब समझ आ गया था. बाबा भी बच्चो के मासूम सवालों से घायल हो चुके थे. मुन्ना अपने घर के गेट पर पहुँच कर छोटू से चिल्लाते हुए बोला “ अब दशहरा में बापू आयेंगे तो बताएँगे कि एक और बापू हैं जो जादूगर हैं” और अपने घर में घुस गया.