शिक्षा के घर को धर्म के घर में तब्दील किये जाने की कौन रच रहा साजिश?

पिछले दो दिनो से कर्नाटक के एक स्कूल में हिजाब पहनकर जाने का मुद्दा देश की सियासत में हंगामा बचाये हुए है। लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर इस मुद्दे को सियासी मुद्दा क्यो बनाया जा रहा है जबकि सभी जानते है कि कई दशक से स्कूल की एक यूनीफार्म होता है और उसे ही पहनकर स्कूल में जाया जाता है। फिर इस पर हंगामा क्यों?

आखिर विवाद किस बात का?

हिजाब को लेकर कर्नाटक में विवाद इतना आखिर क्यों बढ़ गया है जबकि ये मुद्दा एक स्कूल की महज ड्रेस कोड का ही था। फिर इसे धर्म का रूप क्यो दिया जा रहा है? सबसे बड़ी बात ये है कि कुछ लोग सिर्फ सियासत में कुछ लोगों को खुश करने के लिये देश में महिलाओं को बंधन में बांधने की वकालत करने लगे है और मजे की बात ये है कि इसे लागू करने के लिए वो आवाज उठा रहे है जो पहले इसका विरोध करते आये है। ऐसे में ये विवाद सिर्फ सियासती विवाद बनता हुआ दिख रहा है और देश का माहौल खराब करके कही ना कही मोदी सरकार की छवि को खराब करने की एक सोच ही मात्र लगती है। जो ये बता रही है कि मोदी सरकार के विरोध के चलते कुछ लोग तालिबानी सम्यता का भी समर्थन करने लगे है जो आने वाले दिनो में देश के लिये घातक होगा। यहां ये भी हम बताना चाहेंगे कि कई मुस्लिम देश है जहां स्कूलों में हिजाब लगाना अनिवार्य नहीं है। ऐसे में देश में इस व्यवस्था को लागू करके आखिर कुछ लोग क्या बताना चाहते है।

क्या ये बनेगा नया टूलकिट?

अगर इस मुद्दे को देखे तो इसमे फिर से देश में माहौल खराब करने वाली टूलकिट की भी बू आ रही है। क्योंकि कुछ विदेश के लोग भी इस मसले पर अपने राय देकर देश को कटघरे में खड़ा कर रहे है और देश के कुछ लोग उन्हे समर्थन दे रहे है। ऐसे में सबसे पहले विदेश के ऐसे लोगो को आईना दिखाते हुए सवाल करना चाहूंगा कि आखिर वो लोग अफगानिस्तान पर क्यो नही कुछ बोलते है या फिर वो पाकिस्तान में हो रहे अल्पसंख्यक महिलाओं पर अत्याचार पर क्यों चुप रहते है। इसके बाद देश के लोगों से पूछना चाहूंगा कि वो ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर क्यो जयचंद बनकर सामने आ रहे है? क्या वो इसे सियासी मुद्दा बनाकर सिर्फ अपनी सियासत चमकाना चाहते है जिससे देश में एक बार फिर से दो समुदाय के बीच में हिंसा हो और वो रोटिया सेंके?

देश की जनता को ऐसे में इन लोगों कि पहचान करके माहौल को शांत बनाने का काम करना चाहिये जिससे देश के विकास पर ये धर्म के नाम कि हिस्सा फैलाकर स्पीड ब्रेकर ना बने।