कौन हैं मदन गोपाल, जिनका जिक्र मोदी ने “मदन जी” करके अपने ट्वीट में किया?

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इस ट्वीट में मोदी जी ने जिस शख्स का जिक्र किया है, वो हैं 75 वर्षीय मदन गोपाल जो चंडीगढ़ भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के प्रभारी हैं| मदन गोपाल जी सीमा सुरक्षा बल में सूबेदार के पद से १९७१ में सिवानिवृत होने के बाद से ही पार्टी से जुड़े हुए हैं| मदन गोपाल जी पार्टी के ऐसे कार्यकर्ताओं में से हैं जो जनसंघ के समय से ही संगठन से जुड़े हैं|

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चाचा जी के नाम से पार्टी में मशहूर मदन गोपाल जी और मोदी जी की नजदीकियों का इतिहास बहुत पुराना है|जब नरेन्द्र मोदी जी पार्टी के प्रभारी थे, उस समय मदन गोपाल उर्फ़ चाचा जी मोदी जी की बैठकों के आयोजन का कार्यभार सँभालते थे| बैठकों में दरी बिछाने से लेकर, आगंतुकों के चाय-पानी, और प्रधानमत्री मोदी के लिए दाल-चावल बनाने में मदद करना, ये सभी कार्य चाचा जी संतुष्टि पूर्वक किया करते थे| इतना ही नहीं, मदन गोपाल जी ने नरेन्द्र मोदी के बुलावे पर उनके मुख्यमंत्रित्व काल में गुजरात जाकर भी उनके साथ कार्य किया|

बीते मंगलवार को अपने चंडीगढ़ दौरे में प्रधानमंत्री मोदी जिन 6 लोगों से मिले उनमें मदन गोपाल भी थे| चाचा जी से उनकी आत्मीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की बाकी 5 लोगों से मोदी जी ने हाथ मिलाया, लेकिन मदन गोपाल जी को देखते ही गले लगा लिया और उनका कुशल-क्षेम पूछा| चुनाव के बाद मोदी जी ने उन्हें दिल्ली आने का न्योता भी दिया| इस से पहले भी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार हिमाचल प्रदेश के दौरे के दौरान जब नरेंद्र मोदी ऊना आए थे, वहां भी उन्होंने हेलिकॉप्टर से उतर कर चाचा जी से मुलाकात की थी|

मदन गोपाल जी प्रधान मंत्री से मिलने के बाद बहुत खुश हैं और उन्हें एक बार फिर से प्रधान मंत्री की कुर्सी पर देश की बागडोर सँभालते देखना चाहते हैं| संजय टंडन (चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष) बताते हैं कि, “चाचा जी एक कर्मठ पार्टी कार्यकर्ता हैं और 75 साल की उम्र पार करने के बाद भी पार्टी के प्रति समर्पण से काम करते हैं| पार्टी को उनका योगदान और उनकी कर्मठता युवाकार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणाश्रोत है|”

मोदी जी ने स्वयं एक आम कार्यकर्ता की तरह अपने राजनैतिक सफ़र की शुरुआत की थी और अपने समर्पण, त्याग और सेवा भावना से लोगों के दिलों पर राज करते हुए उन्होंने प्रधान मंत्री के पद तक का सफ़र तय किया है| पार्टी के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को वो अच्छी तरह से जानते हैं और जब भी किसी पुराने कार्यकर्ता से उनकी अनायास मुलाकात होती है तो वो उनसे मिलकर पुराने दिनों को याद करने और उनके योगदान की प्रशंसा किये बिना नहीं रहते|

 


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