CJI मामले में जांच की बागडोर सँभालने वाले जस्टिस एके पटनायक को जानिये

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Justice-Patnaik

सर्वोच्च न्यायलय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न और बेंच फिक्सिंग मामले में एडवोकेट उत्सव बैंस द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक को नियुक्त किया है। यह पहला मौका नहीं है जब जस्टिस एके पटनायक को अहम जिम्मेदारी दी गयी है| इससे पहले सीबीआई विवाद के निपटार में भी जस्टिस एके पटनायक अहम किरदार निभा चुके है| अब जब एक बार फिर उन्हें इतनी अहम जिम्मेदारी दी गयी है| तो सबके मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन है जस्टिस एके पटनायक? आइये आपको उनसे रूबरू करवाते है:

कुछ ही समय पहले की बात है, जब सीबीआइ में उपजे विवाद के बाद जस्टिस अनंग कुमार पटनायक सुखियों में आए थे। पटनायक तब सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के ख़िलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाली समिति के अध्‍यक्ष थे। अब वह वकील उत्सव बैंस द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके द्वारा सौंपे जाने वाले सबूतों की जांच करने वाली कमेटी के अध्यक्ष हैं। मालूम हो कि जस्टिस पटनायक 2009 से 2014 तक सुप्रीम कोर्ट में रहे। जस्टिस पटनायक सीबीआई को पिंजरे से आजाद करवाने वाले संविधान पीठ में भी शामिल रहे थे|

‘तोते’ (सीबीआइ) को “पिंजरे” से आजाद करवाया

वो साल था 2003, जब तत्कालीन राजग सरकार ने ‘दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ में धारा-6(ए) जोड़ी थी। इस धारा के तहत संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए सीबीआइ को सरकार की अनुमति लेना जरूरी था। लेकिन, जस्टिस आरएम लोढ़ा, एके पटनायक, एसके मुखोपाध्याय, दीपक मिश्रा और इब्राहिम कलीफुल्ला की संविधान पीठ ने 2014 में इस प्रावधान को खत्म कर दिया था। इस फैसले से करीब एक साल पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाले की सुनवाई के दौरान सीबीआइ को जमकर लताड़ लगाई थी। इस दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि सीबीआइ ‘पिंजरे में बंद तोता’ बन गई है और सिर्फ अपने राजनीतिक आकाओं के सुर में सुर मिलाती है।

2जी स्पेक्ट्रम मामले की सुनवाई

साल 2012 में वो पहली मौका था, जब जस्टिस पटनायक सुर्खियों में आए, तब देश के चर्चित 2जी स्पेक्ट्रम मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच में पटनायक भी शामिल थे। इस पीठ में तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीश एसएच कपाड़िया भी थे। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर केंद्र में सत्‍तारूढ़ कांग्रेस सरकार संकट में थी, और विपक्ष की नजर इस सुनवाई पर टिकी थी।

जस्टिस सौमित्र सेन की सुनवाई

जस्टिस सौमित्र सेन का मामला जस्टिस ऐ.के.पटनायक का सबसे चर्चित मामला है। वह उस तीन सदस्यीय समिति के सदस्य थे, जिसने कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस सेन के खिलाफ लगे फंड के गलत इस्तेमाल के आरोपों की जांच की थी। इस जांच के बाद भारत में ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी जज के खिलाफ महाभियोग चलाया गया था। मालूम हो कि सौमित्र सेन के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया था। लोकसभा में भी इसके पास हो जाने के बाद सौमित्र सेन को इस्तीफा देना पड़ा था। देश में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी जज के खिलाफ महाभियोग चलाया गया हो।

इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर्स प्रोजेक्ट की सुनवाई में भी शामिल

साल 2012 में जस्टिस ऐ.के.पटनायक भारत सरकार के महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर्स प्रोजेक्ट को मंजूरी देने वाले जजों की पीठ में शामिल थे। एक जनहित याचिका के सिलसिले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रमुख नदियों को जोड़ने की योजना तैयार कर उसे 2015 तक क्रियान्वित करने का केंद्र को निर्देश दिया था।

इसके अलावा मतदान के दौरान नोटा का विकल्प देने के मामले से लेकर आइपीएल में स्पॉट फिक्सिंग तक की सुनवाई में भी जस्टिस पटनायक सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल रह चुके हैं।

आखिर कौन हैं एके पटनायक

3 जून 1949 को जन्मे जस्टिस पटनायक ने दिल्ली विश्वविधालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक की पढाई करने के बाद कटक से कानून की पढ़ाई पूरी की। उन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत ओडिसा से की। जहाँ उन्होंने वकालत का काम किया| 1974 में वह ओडिसा बार एसोसिशन के सदस्‍य बने। वकालत शुरू करने के करीब 20 वर्ष बाद 1994 में वह ओडिसा हाईकोर्ट के अतिरिक्‍त सेशन जज बनाए गए। इसके बाद इनका स्‍थानांतरण असम हाईकोर्ट कर दिया गया। इसके बाद वह गुवाहाटी हाईकोर्ट के स्‍थाई जज बनें। वो यहाँ करीब सात साल तक कार्यरत रहे, इसके बाद 2002 में उन्हें अपने गृहराज्य भेज दिया गया|

जस्टिस पटनायक अपने जिंदगी में एक के बाद एक मुकाम हासिल करते ही रहे| वो साल 2005 का मार्च का महिना था, जब जस्टिस पटनायक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनें। इसके सात माह बाद यानी 2005, अक्टूबर में वो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरसी लाहोटी ने छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनके काम को काफी सराहा था| इसके बाद नवंबर, 2009 में जस्टिस पटनायक उच्‍चतम न्‍यायालय के जज बनें। जिसके पांच साल बाद, जून 2014 में वे सेवानिवृत हो गए|


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