जब स्वानमी विवेकानंद के भाषण ने पूरब का पश्चिम से मिलन करवाया था

11 सितंबर, 1893वो दिन जिसने एक ऐसा इतिहास रचा जिसके चलते समूचे भारत की एक अलग पहचान बनी। स्‍वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित धर्म संसद में प्रसिद्ध भाषण दिया उसमें पूरब के चिंतन के बारे में पश्चिम को बताया।स्‍वामी विवेकानंद ने यह बात कही थी कि दुनिया में धर्म के नाम पर सबसे ज्‍यादा रक्‍तपात हुआ है। कट्टरता और सांप्रदायिकता मानवता के सबसे बड़े दुश्‍मन हैं। संभवतया इन्‍हीं अर्थों के कारण 126 साल गुजरने के बावजूद स्‍वामी विवेकानंद का वह भाषण सामयिक और प्रासंगिक बना हुआ है और आज भी सारी दुनिया उनके दिखाये रास्ते पर चलने की कोशिश भी कर रही है। चलिये इस भाषण की 5 अहम बातो पर गौर फरमाते है।

   

 

    भाषण की 5 अहम बातें:

  1. स्‍वामी विवेकानंद ने उस भाषण की शुरुआत ‘मेरे अमेरिकी बहनोंऔर भाईयों ‘ कहकर शुरू की थी। यह संबोधन 19वीं सदी में कई मायनों में अनोखा था दरअसल उस वक्‍त मोटे तौर पर महिला और पुरुष को अलग बांटकर देखने की दुनिया आदी थी। उस परिप्रेक्ष्‍य में दोनों को बराबरी के दर्जे से नवाजा था। उस वक्‍त दुनिया में नारीवादी आंदोलन भी बहुत सक्रिय नहीं हुए थे. आधी आबादी का हक दूर की कौड़ी थी।
  2. स्‍वामी विवेकानंद ने अपने भाषण में कहा कि वे ऐसी भारत भूमि का प्रतिनिधित्‍व करते हैं, जो संन्‍यासियों की परंपरा के लिहाज से सबसे प्राचीन है, जिसने दुनिया को धर्म का मार्ग दिखाया है और जो पूरब में ज्ञान का सूरज रहा है। इसके साथ ही यह बात भी कही कि दुनिया में यही ऐसी इकलौती धरती है जिसने सभी धर्मों को जरूरत के वक्‍त आश्रय दिया, चाहें वे पारसी हों या इजरायली या फिर कोई और दरअसल इसके माध्‍यम से स्‍वामी विवेकानंद ने भारत की सहिष्‍णुता और सनातन संस्‍कृति की बात कहीI
  3. स्‍वामी विवेकानंद ने अपने भाषण में कहा कि दुनिया में धर्म के नाम पर सबसे ज्यादा रक्तपात हुआ है, कट्टरता और सांप्रदायिकता की वजह से सबसे ज्यादा खून बहे हैं। जिसे हर हाल में रोकना होगा आज धर्म के नाम पर दुनिया में आतंकवाद को फैलाया जा रहा है। भारत, आतंकवाद से सबसे ज्‍यादा पीड़ित रहा है।
  4. स्वामी विवेकानंद ने धर्म के प्रचार-प्रसार के बारे में कहा कि जबरन दूसरे धर्म को नष्ट करना किसी धर्म का प्रचार करने का तरीका नहीं हो सकता। उन्होंने दुनिया भर के धर्मावलंबियों से धर्मांधता का विरोध करने और मानवता को प्रतिष्ठित करने की वकालत की।
  5. आज दुनिया में बढ़ रही धर्मांधता, कट्टरता के बीच शांति और भाईचारा स्‍थापित करने की मांग बढ़ रही है। इस मामले में भारत दुनिया में अगुआ की भूमिका निभा सकता है। स्‍वामी विवेकानंद ने भी यही कहा था।

स्वामी विवेकानंद का वो भाषण जो युग बदलने के बाद भी पूरब हो या पश्चिम आज भी कोई भूला नही पाया है और भारत की वसुधैव कुटुम्बकम की परिकल्पना को भी नही जिस पर आज पीएम मोदी सबसे ज्यादा बल देते आये हैं।