जब नवनिर्वाचित सांसदों की गृह मंत्री अमित शाह ने लगाई क्लास

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Amit Shah

लोकसभा सचिवालय की ओर से नवनिर्वाचित सांसदों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सोच समझ कर बोलने की नसीहत दी| अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, “हम जो बोलते है उससे हमारे लोकतंत्र की साख बनती बिगड़ती है, और एक जिम्मेदार सांसद होने के नाते हमें इस बात का बोध होना बहुत जरुरी है| हमे अपने दायित्वों का ध्यान होना चाहिए|”

शाह ने आगे कहा, “हमें ये सदैव ध्यान रखना चाहिए कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में जवाब देना कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन इसके साथ में कानून बनाने की प्रक्रिया में हमारा योगदान महत्वपूर्ण और सटीक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश ने लोकतंत्र को पहले ही स्वीकार कर लिया था। उसके बाद बहस हुई कि लोकतंत्र के किस स्वरूप को हम स्वीकार करें। उस पर हमारी संविधान सभा ने तय किया कि भारत के लिए बहुदलीय संसदीय व्यवस्था हमारे लिए उपयुक्त होगी और उसे हमने स्वीकार किया|”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए शाह ने सांसदों को नसीहत दी की अप जो बोलते है वो आपके क्षेत्र और पार्टी के लोगो तक ही सिमित नहीं है, पूरी दुनिया की नज़र आपकी बातों पर है तो बेहतर है अगर दुनिया तक हमारी एक परिपक्व छवि जाये|

शाह ने कहा, “सभी दलों के सांसद यहा मौजूद हैं, आप पहली बार चुनकर आए हैं। इसके लिए बहुत-बहुत बधाई। हमें यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि 130 करोड़ लोगों के देश में से 543 सांसद चुने जाते हैं। हम उन 543 में से एक हैं। औसत तौर पर हममें से हर कोई 15 लाख से ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है। जिस संस्था में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उसका गौरव पहचानना बेहद जरूरी है।“

अमित शाह ने कहा कि एक नागरिक का देश के प्रति धर्म क्या होता है? एक सांसद का संसद के प्रति धर्म क्या होता है इसका बोध कराने के लिए ये ‘धर्मचक्र प्रवर्तनाय’ का सूत्र यहां लिखा है। नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि ‘धर्मचक्र प्रवर्तनाय’ का मतलब है कि भारत के शासक धर्म के रास्ते आगे बढ़े। धर्म का मतलब ‘रिलीजन’ नहीं होता है बल्कि धर्म का मतलब ‘फर्ज’ होता है, हमारा ‘दायित्व’ होता है। उन्होंने कहा कि संसद के हर द्वार के ऊपर वेद, उपनिषद और सभी धर्म ग्रंथों से अच्छी बातें लिखी हैं और सभी सांसदों से अनुरोध है कि उन बातों को वे जरूर पढ़ें।

 


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