21 दिन में 6 मेडल जीतने वाली हिमा दास के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का क्या है राज, आइये जाने उनकी कुछ खास बातें

Hima Das winning 6 medals in 21 days

हिमा दास ये नाम कुछ हफ्ते पहले बिलकुल सामान्य था और कुछ सिमित लोगों तक परिचित था पर इस नाम के व्यक्ति के पिछले 21 दिन के कारनामे ने सिर्फ अपने देश में नहीं बल्कि पुरे विश्व में अपना लोहा मनवाया है | जी हाँ हम बात कर रहे है एथलीट हिमा दास की जिन्होंने चेक गणराज्य में आयोजित ट्रैक एंड फील्ड प्रतिस्पर्धा में पिछले 21 दिन के अंदर छह स्वर्ण पदक जीतकर पूरी दुनिया में अपना शौर्य और रुतबा स्थापित किया है |

आज देश-विदेश में हर कोई इस 18 वर्षीय एथलीट के जज्बे और साहस को सलाम कर रहा है | वो कहते है भीड़ का हिस्सा तो हर कोई बन सकता पर भीड़ से निकल कर खुद को चुनौती देने का जज्बा जिसके अन्दर होता है असल में दुनिया पर अपनी छाप वही छोड़ता है | आज हिमा पुरे देश के साथ-साथ अपने हमउम्र एथलीट की भी प्रेरणा बन चुकी है | हर कोई हिमा के इस अदम्य साहस का राज जानना चाहता है | और इसलिए हमने हिमा के करीबी दोस्तों से बात करने की कोशिश की | बातचित में उनके करीबी दोस्त पलाश से हमें हिमा के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला |

Hima_Das

पलाश का कहना है की हिमा शुरू से ही जिद्दी लड़की है और जब तक वो अपना टारगेट पूरा न कर ले तब तक अड़ी रहती है | उसके इतने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का सिर्फ एक ही राज़ है की जब भी वो किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेती है तो उसका लक्ष्य मेडल जितना नहीं बल्कि अपने दौड़ने की टाइमिंग को बेहतर करना होता और बस इसी क्रम में उसे मेडल मिल जाता है | और जब वो मेडल जीत जाती है तो उसे मेडल के जीत की ख़ुशी कम और अपने भागने की टाइमिंग को एक लेवल ऊपर ले जाने की ख़ुशी ज्यादा होती | वो अपने हर प्रतियोगिता में अपने प्रतिद्वंदी से पहले खुद को चुनौती देती है | उसका यही अंदाज़ उसे और खिलाडियों से अलग और खास बनाता है | घर में बड़े पापा यानी पिता के बड़े भाई हिमा को खूब प्रोत्साहित करते हैं |

पलाश बताते है की अपने 6 दोस्तों में हिमा अकेली लड़की है और हिमा के दोस्तों को बीके चलने का बहुत शौक है | एक बार तो ऐसा हुआ की जब हिमा गांव में एक प्रतियोगिता जीतने के बाद लौटी थीं और सबसे पहले दोस्तों से मिलने गईं तब उसके दोस्तों में किसी ने कह दिया की चलो बीके रेस में जीत कर दिखाओ | हिमा झट से राज़ी हो गयी और इतना ही नहीं बीके रेस जीत भी गयी |

हिमा जितनी प्रखर खिलाडी है उतनी ही अच्छी इन्सान भी | वो हमेशा किसी के भी मदद के लिए तत्पर रहती है | उन्होंने असम बाढ़ पीडि़तों को अपनी पुरस्कार राशि का एक बड़ा हिस्सा दान कर दिया है | एक उभरते हुए खिलाडी का ये रूप अपने अप में प्रसंशनीय है | इस समय उनका अपना परिवार भी बाढ़ की मुश्किल परिस्थिति से गुजर रहा है पर उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है ताकि उनका खेल प्रभावित न हो |

बता दे इस साल चेक गणराज्य में आयोजित ट्रैक एंड फील्ड प्रतिस्पर्धा में 21 दिन के अंदर छह स्वर्ण पदक जीतें है और साथ ही उन्होंने 400 मीटर की दौड़ में 51.46 सेकंड का समय लेकर रिकॉर्ड बनाने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गई हैं|