ऐसे आंदोलन की क्या जरूरत जिससे जनता का हो नुकसान

सरकार के खिलाफ पहले भी आंदोलन होते थे। चक्का जाम किया जाता था लेकिन ऐसा कुछ देखने को नही मिलता था जिससे देश का नुकसान हो लेकिन बीते कुछ दिनो से ये देखा जा रहा है कि आंदोलकारियों के जिद्द का घाटा देश की आम जनता को उठाना पड़ता है। अब पंजाब में चल रहे किसानों के रेल रोको आंदोलन से ही देश को करीब 500 करोड़ रूपये की चपत लग चुकी है। 


हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

पंजाब हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की जोरदार फटकार लगाई है। उच्च न्यायालय ने इस बाबत बोला कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को संभालने में असमर्थ है। इतना ही नही कोर्ट ने नराजगी जताते हुए बोला अगर सरकार पटरियों को साफ करने में विफल रहती है, तो वह एक आदेश जारी करेगी कि पंजाब सरकार संविधान का पालन करने में विफल रही है। ध्यान देने वाली बात ये है कि किसानों के इस कदम से पंजाब में ‘इस्पात उद्योग से लेकर आवश्यक वस्तुओं तक लगभग हर चीज की कमी होने लगी है।’ रेल नहीं चल पाने के कारण बिजली स्टेशनों को बिजली उत्पादन के लिए कोयला नहीं मिल पा रहा है, जिससे राज्य भर में बिजली की भारी कमी हो रही है। लेकिन इसके बावजूद भी सिर्फ अपने आपको चमकाने के लिये आंदोलन के नाम पर नौटंकी देखी जा रही है जिससे पूरा प्रदेश परेशान हो रहा है। जबकि होना ये चाहिये कि लोगों को समझाया जाये कि आंदोलन ऐसी जगह नही करना चाहिये जिससे देश की रफ्तार रूक जाये।

शाहीन बाग प्रदर्शन को भी कोर्ट ने बताया था गलत

इसी तरह CAA, NRC को लेकर शाहीन बाग में चलते वाले प्रदर्शन को भी कोर्ट गलत बता चुका है। लगभग 3 महीने चले इस प्रदर्शन के चलते इलाके की दुकानों में काम बिलकुल ठप्प हो गया तो लोगों को नोएडा जाने में भी खासी दिक्कत उठानी पड़ती थी। ऐसे में ये समझ में नही आता कि आखिर आंदोलनकारी किसको परेशान करना चाहते है सरकार को या फिर देश की जनता को? कुछ लोगों की शह पाकर और मीडिया की चमक धमक देखकर ये लोग वो काम करना शुरू कर देते है जिससे आर्थिक समाजिक दोनो तरह की हानि सिर्फ जनता को ही उठानी पड़ती है। इसके हम कई बार गवाह भी बन चुके है।

ऐसे में आंनदोलनकारियों और राज्य की सरकार को इस बात का ध्यान देना चाहिये कि इससे उनके राज्य में कही और दिक्कत तो नही हो रही है और अगर हो रही है तो इस तरह के आंदोलन के खिलाफ सख्त कदम उठाकर आंदोलकारियों को हटा देना चाहिये क्योकि कोरोना काल में वैसे ही आर्थिक स्थिति की जो हालत है उसमे तेजी लाने के लिये इस तरह के स्पीडब्रेकर अब देश को मंजूर नही है।