जोजिला टनल एशिया की सबसे लंबी सुरंग में क्या है खास.. क्यों देश के लिए महत्वपूर्ण है?

पिछले 7 सालों में देखे तो मोदी सरकार की भरपूर कोशिश रही है उन क्षेत्र के विकास करने की जहां आजादी के बाद से कोई काम बड़ा नहीं हुआ या उन इलाकों के विकास के लिये योजनाए तो बनाई गई लेकिन जटिल परिस्थिति होने के चलते बाद में उन्हे इतनी प्रथामिकता के आधार पर नहीं लिया गया। लेकिन आज ऐसा नही है उत्तर हो या पश्चिम-पूरब हो या दक्षिण, हर तरफ विकास के पैमानो को लेकर किसी तरह की सियासत नहीं देखी जाती है तभी तो विकास के काम तेजी के साथ होते है। उदाहरण के तौर पर अब जोजिला सुरंग को ही ले ले जिसका काम सालो से अटका था लेकिन मोदी सरकार ने जैसे ही इसको तैयार करने का काम लिया तेजी के साथ वहां काम चल रहा है जिससे कयास यही लगाये जा रहे है कि ये जोजिला सुरंग तय समय पर पूरा होगा। इस टनल के पूरा होने पर सर्दियों में होने वाली भारी बर्फबारी के बीच श्रीनगर-लेह-लद्दाख हाइवे बंद नहीं होगा और लद्दाख जाना आसान होगा। आइए जानते हैं जोजिला टनल क्यों इतना खास है…

कुतुबमीनार से 5 गुना ऊंचाई पर सुरंग

जोजिला टनल को एशिया की सबसे लंबी सुरंग बताया जा रहा है। इस सुरंग की नींव मई 2018 में ही रख दी गई थी, लेकिन टेंडर पाने वाली कंपनी IL&FS दिवालिया हो गई। उसके बाद हैदराबाद की मेघा इंजिनियरिंग को इसका ठेका दिया गया। जहां टनल बनाया जा रहा है, वह जगह कुतुबमीनार से 5 गुना अधिक ऊंचाई पर है। जोजिला पास के करीब 3,000 मीटर की ऊंचाई पर यह सुंरग बनाई जा रही है। इसकी लोकेशन श्रीनगर-लेह पर है। यह सुरंग करीब 14.15 किलोमीटर लंबी है। इसे एशिया की सबसे लंबी सुरंग बताया गया है। इस टनल के पूरा होने पर जो दूरी तय करने में साढ़े तीन घंटे लगते हैं, वह सिर्फ 15 मिनट में पूरी हो जाएगी यानी लोगों के 3 घंटे 15 मिनट बचेंगे।

भारतीय सेना के लिए भी अहम है यह प्रोजेक्‍ट

यह सुरंग आम जनता और पर्यटकों के साथ-साथ भारतीय सेना के लिए भी बेहद अहम है। इसके पूरा होने पर हर मौसम में कश्मीर घाटी से लद्दाख का संपर्क बना रहेगा। श्रीनगर, द्रास, करगिल और लेह के इलाके जुड़े रहेंगे। यह इसलिए भी बेहद महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि सेना के लिए यह सड़क सियाचिन तक जाती है। आने वाले समय में श्रीनगर-करगिल-लेह के रास्‍ते में हिमस्‍खलन का डर नहीं रहेगा। सुरंग के भीतर सड़क के दोनों तरफ, हर 750 मीटर पर इमर्जेंसी ले-बाई होंगे। कैरियज वे के दोनों तरफ भी साइड वाक्‍स होंगी। यूरोपीय मानकों के अनुसार, सुरंग के भीतर हर 125 मीटर की दूरी पर इमर्जेंसी कॉल करने की सुविधा होगी। पूरी सुरंग में ऑटोमेटिक फायर डिटेक्‍शन सिस्‍टम लगाया जाएगा और मैनुअल फायर अलार्म का बटन भी होगा।

सुरंग की दीवारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। सुरंग के दोनों छोर पर खंभे लगाकर कैमरा इंस्‍टॉल किए जाएंगे। सीसीटीवी फुटेज कंट्रोल रूम भेजे जाएंगे।

 

इसमे कोई दो राय नही है कि पिछले 7 सालों से देश में विकास की नई गाथा लिखी जा रही है और सबसे बड़ी बात ये है ज्यादातर जितनी भी योजनाए है वो तय समय में पूरी भी हो रही है। जमीनी हकीकत में आज देश का हर नागरिक उसका फायदा उठा रहा भी है।