Fake news: पूर्व सेना अध्यक्ष ने कहा – ‘राष्ट्रपति को नहीं लिखी चिट्ठी’

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लोकसभा चुनाव आते ही फेक न्यूज़ की चर्चा जोड़ पकड़ ली हैं| आपको बता दें कि फेक न्यूज़ का इस्तेमाल कर राजनीतिक  पार्टियाँ लोगों को गुमहार करती हैं| हाल ही में इसके संदर्भ में नया मामला सामने आया है, खबरों के मुताबिक बता दें कि एक चिट्ठी में सेना के 8 पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया है, लेकिन आपको बता दें की यह न्यूज़ फेक हैं | पूर्व सेना प्रमुखों ने सशस्त्र सेनाओं के राजनीति इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी को गलत बताया है|पूर्व सैनिकों ने कहा कि सेना के लोकसभा चुनाव 2019 में राजनीतिक इस्तेमाल से जुड़ी चिट्ठी राष्ट्रपति को नहीं लिखी है|

पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी शामिल हैं|

हालांकि पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज ने इस तरह के किसी पत्र से इंकार किया है|उन्होंने कहा, ‘सर्विस के दौरान हम जो भी सरकार होती है उसका ऑर्डर फॉलो करते है, सेना का राजनीति से कोई लेना देना नहीं होता है, कोई कुछ भी कह सकता है और उसे फेक न्यूज बनाकर बेच सकता है| मैं नहीं जानता कि वो कौन लोग हैं जिन्होंने यह सब लिखा है’|

आज पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने इससे इंकार किया है, एनसी सूरी ने कहा, ‘इस चिट्ठी में जो कुछ भी लिखा है मैं उससे सहमत नहीं हूं| हमारी बात को गलत ढंग से पेश किया गया है|

इस कथित चिट्ठी में 20वें नंबर जिनका नाम है उन पूर्व वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एमएल नायडू ने कहा, ‘नहीं, ऐसे किसी पत्र के लिए मेरी सहमति नहीं ली गई है ना ही मैंने ऐसा कोई पत्र लिखा है|’

इस कथित पत्र पर तीन पूर्व नौसेना प्रमुखों एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, एडमिरल (सेवानिवृत्त) अरुण प्रकाश, एडमिरल (सेवानिवृत्त) मेहता और एडमिरल (सेवानिवृत्त) विष्णु भागवत के भी हस्ताक्षर हैं| दावा किया जा रहा है कि पत्र गुरुवार को राष्ट्रपति के पास भेजा गया|

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कथित चिट्ठी में पूर्व सैनिकों की तरफ से लिखा गया, ‘‘महोदय हम नेताओं की असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकृत प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं जिसमें वह सीमा पार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं और यहां तक कि सशस्त्र सेनाओं को ‘मोदी जी की सेना’ बताने का दावा तक कर रहे हैं|’’ पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह चिंता और सेवारत तथा सेवानिवृत्त सैनिकों के बीच असंतोष का मामला है कि सशस्त्र सेनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए किया जा रहा है|

गौरतलब है कि ये अब आम बात हो गयी कि किसी भी सत्ताधारी पार्टी को किसी भी तरह से बदमान किया जाये| ये पहली बार नहीं हुआ जब किसी ने ये फेक न्यूज़ फैला कर लोगो को गुमराह किया हो|


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