वैक्सीन, रेलवे कोच और अब सिरंज: दुनिया में तेजी से उभर रही आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर

पिछले 6 सालों में भारत जिस तेजी के साथ आत्मनिर्भर बन रहा है आज उसी का असर है कि दुनिया में हर तरफ भारत की छवि बदली है। भारत का लोहा दुनिया के मुल्क मान रहे है फिर वो कोई भी सेक्टर क्यो न हो। खासकर कोरोना के बाद जिस तरह से भारत ने वैक्सीन दुनिया को देखकर अपने देश की उत्पादन की क्षमता दिखाई है तो भारतीय रेल ने भी मेक इन इंडिया के तहत बने रेल कोच इंजन का दमखम आज विश्व देख रहा है।

वैक्सीन से सिंरज तक भारत विश्व को दे रहा

दुनिया के 100 देशों से अधिक देशो में कोरोना की मेक इन इंडिया वैक्सीन भेज चुका है। इतना ही नहीं अधिकतर देशों में भारत ने ये वैक्सीन मुफ्त में भेजी है। इसी तरह भारत वैक्सीन लगाने के लिये सिंरज भी विश्व में सबसे ज्यादा सप्लाई कर रहा है। ऑकड़ो पर नजर डाले तो भारत ने अभी 120 देशों में सिरंज निर्यात किया है। जिसमे सबसे ज्यादा ब्राजील में जहां 7.9 करोड़ तो जापान में 1.5 करोड़ तो यूएन के द्वारा करीब 24 करोड़ सिंरज दूसरे देशों को दी जा चुकी है जो भारत की उत्पादन क्षमता को बताता है। इसी तरह कोरोना महामारी की शुरूआत में भी समूचे विश्व को दवाई भी दी थी।

भारतीय रेल का विश्व में दिख रहा दमखम

दूसरी तरफ भारतीय रेल की बात करे तो कल तक जो रेल विदेशों से सामान  आयात करता  था वो आज खुद निर्यात कर रहा है। भारत में बने रेल कोच आज 14 देशों में निर्यात किये जा रहे है। 721 कोच तो विदेश में दौड़ भी लगा रहे है तो भारत के रेल इंजन की मांग भी विश्व के देशों से आ रही है। खासकर दक्षिण अफ्रिका के देश और कुछ एशिया के देश भारतीय रेल को रेल इंजन निर्यात करने का ऑर्डर भी दे चुके है। इतना ही नहीं भारत में तैयार हुए मैट्रो कोच का एक बड़ा बाजार भारत बन चुका है जिसके तहत मलेशिया ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मैट्रो कोच को लोग खूब पंसद कर रहे है और महज ये सब पिछले 6 सालो में हो पाया है जो ये भी बताता है कि अगर मजबूत इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी लक्ष्य बढ़ा नहीं होता।

वैसे इसके साथ साथ आज रक्षा के क्षेत्र में भी भारत लागात निर्यातक देश बन रहा है भारत फिलिपिस को मिसाइल सप्लाई कर रहा है तो कई और मुल्क भारत से चोटे छोटे हथियार खरीद रहे है। यानी भारत इन सेक्टर में उतर कर अपनी इकोनॉमी तो बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ दुनिया में ये भी बताने में कामयाब साबित हो रहा है कि भारत अब आत्मनिर्भर तेजी से बन रहा है।