टीकाकरण की स्पीड में नहीं आनी चाहिए कमी तभी कोरोना से जीत सकेंगे जंग

देशभर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के साथ वैक्सीनेशन की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। एक मई से सरकार ने 18 उम्र को पार चुके लोगों के लिए भी वैक्सीनेशन का रास्ता खोल दिया है और कई राज्य इस दिशा में काफी अच्छी काम कर रहे हैं। इस बीच पीएम मोदी ने कोरोना को लेकर समीक्षा बैठक में वैक्सीन की स्पीड धीमा न हो और बर्बादी कम करने की अपील की है।

टीकाकरण के लिए नागरिकों को दी जानी चाहिए सुविधाएं

पीएम मोदी ने हालात का जायजा लेते हुए आदेश दिया है कि लॉकडाउन के बीच भी टीकाकरण के लिए नागरिकों को सुविधा दी जानी चाहिए और टीकाकरण में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों को किसी दूसरी ड्यूटी के लिए डायवर्ट नहीं किया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने अगले कुछ महीनों में कोरोना वैक्सीन) का उत्पादन बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करने की भी समीक्षा की। बैठक में प्रधानमंत्री को बताया गया कि राज्यों को लगभग 17.7 करोड़ वैक्सीन की सप्लाई की गई है और जल्द ही बची डोज भी राज्यों को भेज दी जायेगी।

वैक्सीन की बर्बादी कम करना जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग को मजबूत करने के लिए वैक्सीन की बर्बादी कम करना सबसे अहम है। उन्होंने बुधवार को ट्वीट करते हुए वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए केरल सरकार के प्रयासों की भी सराहना की है। दरअसल केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था कि राज्य को केंद्र सरकार से टीकों की 73,38,806 खुराकें मिलीं और उपलब्ध अतिरिक्त खुराकों का भी इस्तेमाल करते 74,26,164 खुराकें दी गईं। मुख्यमंत्री ने इसके लिए राज्य के स्वास्थ्यकर्मियों, खासकर नर्सों की तारीफ की थी जिसके बाद केरल का उदाहरण देकर पीएम ने दूसरे राज्यों को वैक्सीनेसन में लापरवाही न बरते के साथ साथ बर्बादी पर रोक लगाने के लिये मुहीम चलाने की बात कही है।

वैसे देखा जाये तो अगर वैक्सीन की बर्बादी कम हुई होती तो राजस्व भी बचता और वैक्सीन की जो थोडी किल्लत देखी जा रही है वो भी नहीं देखने को मिलती। इसलिये कोरोना से अगर हमे जंग जीतना है तो वैक्सीन की बर्बादी रोकनी होगी तो जो लोग वैक्सीन लगवाने जा रहे है उनका भी ख्याल रखना होगा।