मोदी सरकार के विदेश नीति का कमाल – अब भारत और अमेरिका मिलकर बनायेंगे छोटे मानवरहित विमान

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मोदी सरकार के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय दिन-प्रतिदिन नए आयामों को चूम रहा है| चाहे वो रक्षा क्षेत्र की मजबूती के लिए हुए करार की बात हो या फिर विदेश नीतियों के चलते देश के प्रभाव की बात | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के नीतिगत फैसलों के बदौलत ही आज भारत समूचे विश्व में देश को लेकर बन चुकी अवधारणा को बदलने में कामयाब हुआ है| यह मजबूत सरकार के नेतृत्व का ही कमाल है कि आज विश्व भर के देशो में भारत में निवेश करने की होड़ मची है| इतना ही नहीं इसके अलावा भारत आज अपनी सुरक्षा को लेकर काफी संवेदनशील है और किसी भी तौर पर समझौता करने को तैयार नहीं है|

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प्रतीकात्मक तस्वीर

इस कड़ी में अब एक और नया अध्याय जुड़ गया है| दरअसल पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि, भारत और अमेरिका ने विमान रखरखाव से इतर छोटे मानवरहित विमान और हलके एवं छोटे आयुध बनाने की प्रौद्योगीकी सम्बन्धी परियोजना को दोनों देशो के बीच रक्षा सहयोगो के लिए चिन्हित किया है| गौर करने वाली बात यह है कि, अमेरिका के तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों ही देशो के रक्षा अधिकारी ने हाल ही में रक्षा प्रौद्योगीकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) की वार्ता की थी|

भारत-अमेरिका के बीच रक्षा प्रौद्योगीकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) की बैठक में दोनों ही देशो में उद्योगों को मिलकर काम करने और अगली पीढ़ी की तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया| ‘एक्विजिसन एंड सस्टेनमेंट’ यानी अधिग्रहण और निरंतरता के सन्दर्भ में अमेरिकी सहायक रक्षा मंत्री एलेन लॉर्ड ने शुक्रवार को पेंटागन में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि, हम एक जिस परियोजना पर विचार कर रहे है, वह छोटे मानवरहित विमानों को लेकर है|

इस सम्बन्ध में लार्ड ने रक्षा उत्पादन सचिव अजय कुमार के साथ बैठक की सह अध्यक्षता कि| इसमें ड्रोन को लेकर भी बातचीत चल रही है| जिसमे अमेरिकी वायुसेना अनुसन्धान प्रयोगशाला और भारतीय रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन शामिल है| इस सन्दर्भ में दोनों देश अप्रैल में तकनीकी योजना सम्बन्धी दस्तावेज तैयार करेंगे| उन्होंने बताया की हम सितम्बर में इस योजना पर हस्ताक्षर की योजना बना रहे है|

इस बाबत लार्ड ने यह भी बताया कि, अमेरिकी और भारतीय तकनीक को साथ लेकर उन्हें युद्ध में लड़ने की क्षमता के तौर पर विकसित किया जाए जिसका उपयोग भारत और अमेरिका दोनों ही कर सके| इससे अमेरिका और भारत दोनों ही को लाभ होगा|


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