ट्रम्प के बयान पर चीन का पलटवार – 3 अमेरिकी पत्रकारों को किया बाहर

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कोरोना को लेकर अमेरिका और चीन के बीच एक नई जुबानी जंग छिड़ गई है। जब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोरोना को चीनी वायरस कहा है तब से दोनों देशों के नेताओं के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ सी लग गयी | इस आरोप-प्रत्यारोप में अमेरिकी राष्ट्रपति भी कूद पड़े हैं |

यह है अमेरिका-चीन के बीच ताजा विवाद की जड़

चीन और अमेरिका के बीच ताजा विवाद तब पैदा हुआ जब सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस को ‘चीनी वायरस’ का नाम दे दिया। मंगलवार को ट्रंप ने फिर इसे ‘चीनी वायरस’ कहा। इस पर चीनी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अमेरिका चीन को गाली देने से पहले अपने काम पर ध्यान दे।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिन ने कोरोना के लिए सीधे अमेरिकी सेना को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए कहा था, अमेरिकी सेना इस वायरस को उसके क्षेत्र में लाई थी। तब अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि चीन गलत जानकारी न फैलाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी वायरस को किसी खास समूह या क्षेत्र से जोड़ने को गलत बताया है।

अब चीन का कहना है कि उसने अमेरिकी पत्रकारों को इसलिए बाहर का रास्ता दिखाया है क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने फैसला किया कि अब वह चीन के सरकारी मीडिया से जुड़े चुनिंदा चीनी पत्रकारों को ही अपने यहां रहने की अनुमति देगा।

अमेरिका ने बदला लेने को मजबूर किया: चीन

एक बयान में कहा गया है, ‘उन्हें हॉन्ग कॉन्ग और मकाओ समेत चीन के किसी हिस्से में बतौर पत्रकार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’ पेइचिंग ने वॉइस ऑफ अमेरिका, द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, द वॉशिंगटन पोस्ट और टाइम मैगजीन को कहा है कि वह चीन में अपने स्टाफ, संपत्तियों, कामकाज और रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज के बारे में लिखित जानकारी दे। वॉशिंगटन ने हाल ही में चीन की सरकारी मीडिया के लिए यही नियम लागू किए हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी मीडिया संस्थानों पर की गई कार्रवाई को पूरी तरह जवाबी बताते हुए कहा कि उसे अपने मीडिया संस्थानों के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के बदले में कदम उठाने को मजबूर किया गया है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने चीन से इस कदम पर विचार करने को कहा।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने की अपील

पॉम्पियो ने कहा कि चीन अपने सरकारी मीडिया संस्थान की बराबरी अमेरिका के स्वतंत्र मीडिया संस्थानों से करके गलती कर रहा है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे चीन के फैसले पर दुख है। इससे दुनिया में स्वतंत्र पत्रकारिता के मकसद को धक्का लगेगा। वैश्विक संकट के दौर में चीन के लोगों को अधिक सूचनाएं और ज्यादा पारदर्शिता की जरूरत है ताकि उनकी जान बच सके।’ उन्होंने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने की आलोचना

उधर, द न्यूयॉर्क टाइम्स के कार्यकारी संपादक ने चीन की कार्रवाई की आलोचना करते हुए उम्मीद जताई कि दोनों देशों की सरकारें जल्द ही इस विवाद का समाधान कर लेगी। उन्होंने कहा कि द न्यूयॉर्क टाइम्स चीन में 1850 से ही रिपोर्टिंग कर रहा है।


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