जनधन योजना के तहत 35.39 करोड़ खाते, 97 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंची जमा राशि

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मोदी सरकार की प्रमुख जन कल्याणकारी योजनाओ में से एक ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ दिन-प्रतिदिन अपने नाम नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है| ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ का उद्देश्य अब तक बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को बैंकिंग प्रणाली के दायरे में लाना है। यह योजना अपने मकसद को पूरा करने में लगातार कामयाब हो रही है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार जहां जनधन खातों की संख्या बढ़कर 35.39 करोड़ पहुंच गयी है। वहीं कुल जमा राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह तीन अप्रैल को 97,665.66 करोड़ रुपये पहुंच गयी। जबकि, 27 मार्च तक इन खातों में जमा राशि 96,107.35 करोड़ रुपए के आंकड़ो को पार कर गयी थी|

रूपे डेबिट कार्ड पाने वाले खाताधारकों की संख्या 27.89 करोड़ से अधिक

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महज 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई इस योजना के तहत अबतक 27.89 करोड़ से अधिक खाताधारकों को रूपे डेबिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। ख़ास बात यह है कि जनधन योजना के तहत अब तक जितने भी खाते खुले है, उनमे से करीब 59 प्रतिशत खाते ग्रामीण तथा अर्द्ध-शहरी क्षेत्र में खोले गए है। जो यह सिद्ध करता है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्यजन को आर्थिक रूप से सशक्त करने का माध्यम बन गई है।

दुर्घटना बीमा से लेकर ओवरड्राफ्ट तक की सुविधाएं

‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ से जुड़ी एक ख़ास बात यह भी है कि सरकार ने इन खातों में मिलने वाले ओवरड्राफ्ट की सुविधा को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया। इसके साथ ही इसके तहत मिले रुपे कार्ड से जुड़ी दुर्घटना बीमा योजना के तहत मिलने वाली राशि की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है जो 28 अगस्त 2018 के बाद खुलने वालों खाताधारकों के लिए होगा। इसके तहत 2 हजार रुपये तक की ओडी के लिए कोई शर्त नहीं होगी और ओडी लेने वालों की आयु पहले 18 से 60 वर्ष थी जिसे बढ़ाकर अब 65 वर्ष कर दी गयी है। असल में ये सारे कदम जनधन योजना को और भी आकर्षक बनाने के लिए सरकार द्वारा की गयी है|

महिला सशक्तीकरण का आधार बनी जनधन योजना

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जनधन योजना के तहत अब तक 35 करोड़ से ज्यादा लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ चुके हैं, यानी करोड़ों-करोड़ लोगों ने पहली बार बैंक में प्रवेश किया है। ख़ास बात यह है कि, कुल खातों में 50 प्रतिशत से अधिक खाते महिलाओं के नाम पर हैं। जनधन खातों को खुलवाने में लोगो को परेशानियों का सामना न करना पड़े इसलिए खाताधारकों की मदद के लिए बैंक मित्र भी बनाए गए हैं। लिहाजा इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में भी बढ़ोतरी हुई है|

जनहित योजनाओं में भ्रष्टाचार पर लगी रोक

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प्रधानमंत्री जनधन योजना के आने से एक अतरिक्त मुनाफा यह हुआ है कि केंद्र सरकार समाजिक सुरक्षा के तहत दी जाने वाले तमाम पेंशन, खाद्यान्न सब्सिडी, गैस सब्सिडी आदि का पैसा इन्हीं जनधन खातों के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचा रही है। जिससे अब ग्रामीणों के खातों में बगैर किसी भ्रष्टाचार के सब्सिडी की रकम पहुंच रही है| ऐसे में यह प्रक्रिया भी जनधन योजना के तरफ लोगो को आकर्षित कर रहा है| और खाताधारक समय-समय पर वित्तीय लेन-देन कर रहे है|

जनधन योजना के बंद होने का कोई तिथि निर्धारित नहीं

जनधन योजना की काफी सफलता को देखते हुए सरकार ने इस योजना को निकट भविष्य में बंद करने का कोई फैसला नहीं लिया है| लिहाजा जब तक इससे संबधित घोषणा नहीं होता है| तब तक यह योजना खुली रहेगी। गौरतलब है कि, पीएमजेडीवाई को अगस्त, 2014 में शुरू किया गया था। तब योजना को चार साल के लिए खोला गया था। लेकिन योजना के सफलता और जनहित को केंद्र में रखकर इसे निरन्तर रखने का फैसला लिया गया है|