CAA विवाद पर ममता के जनमत संग्रह की मांग को यूएन ने ठुकराया

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नागरिकता संशोधन कानून 2019 (Citizenship Amendment Act 2019) के विरोध में खड़े राजनीतिज्ञों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सबसे मुखर थी| न सिर्फ उन्होंने इस कानून को अपने राज्य में लागू होने से रोकने की बात की, बल्किउन्होंने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में हस्तक्षेप कर के राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह की मांग की थी|

संयुक्त राष्ट्र ने दो टूक शब्दों में मना किया

राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह की मांग संबंधी ममता के बयान पर संयुक्त राष्ट्र का जवाब आ गया है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत में नागरिकता कानून पर जनमत संग्रह की मांग को ठुकरा दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस के प्रवक्ता स्टीफन डुजैरिक ने शुक्रवार को कहा कि सिर्फ राष्ट्रीय सरकार के अनुरोध पर ही यूएन किसी भी मामले से जुड़ता है। राज्य सरकार अथवा किसी राजनेता की मांग पर ऐसा नहीं किया जा सकता|

स्टीफन डुजैरिक ने आगे कहा कि CAA भारत में हो रहे प्रदर्शनों पर यूएन की नजर है। लोगों को शांतिपूर्वक विरोध करना चाहिए।

क्या कहा था ममता बनर्जी ने

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने नागरिकता कानून के विरोध में बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि इस कानून के विरोध में लोग आ रहे हैं। इस वजह से कानून को लेकर जनमत संग्रह करवाना चाहिए। ममता बनर्जी ने यहां तक कह दिया था कि ये जनमत संग्रह या तो संयुक्त राष्ट्र करे या फिर इसको अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से करवाया जाए। ममता के इस बयान का भाजपा ने जमकर विरोध किया था।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के विरोध में देश भर में विपक्ष समर्थित विरोध प्रदर्शन हुए थे| पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था और भीड़ ने रेलवे की संपत्ति को खासा नुकसान पहुँचाया था| ममता बनर्जी ने खुद (CAA) और NRC के विरोध में प्रदर्शन का नेतृत्व किया था|


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