UN ने माना पाक में अल्पसंख्यक खतरे में है

UN acknowledges minority threat in Pakistanइमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता खत्म होती जारी है। महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग का कहना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता लगातार बिगड़ती जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र ने माना है कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही है। वहां के हिंदू और ईसाई समुदाय सबसे ज्यादा खतरे में हैं। इन दोनों समुदायों की महिलाओं और बच्चियों को अगवा कर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। मुस्लिम युवकों से शादी होने के बाद उनके परिवार के पास लौटने की उम्मीद बहुत कम होती है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का कानून हाल ही में भारत में पास हुआ है, जिसे लेकर देश के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वीमेन, सीएसडब्लु की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा दे रही है। कमीशन ने 47 पन्नों की रिपोर्ट को- पाकिस्तान: धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला, नाम दिया है। सीएसडब्लु ने पाकिस्तान में ईशनिंदा और अहमदिया विरोधी कानून के बढ़ते राजनीतिकरण पर भी चिंता जताई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कानूनों को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन सिर्फ अल्पसंख्यकों को मारने के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीति में जगह बनाने के लिए भी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

minority threat in Pakistan

भेदभावपूर्ण रवैया

रिपोर्ट में पाकिस्तान की पुलिस और न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। पुलिस और न्याय व्यवस्था अल्पसंख्यक पीड़ितों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हैं। ऐसे मामलों में न्यायिक व्यवस्था भी काफी कमजोर रहती है। पुलिस और न्यायपालिका अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक मानती है।

अल्पसंख्यकों का जीना मुश्किल

यूएन की रिपोर्ट से पहले पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2018 में यहां अपनी आस्था के मुताबिक जिदंगी गुजारने पर अल्पसंख्यकों ने उत्पीड़न का सामना किया, उन्हें गिरफ्तार किया गया। हिंदू-ईसाई महिलाओं से बलात्कार किया गया।

रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों पर हमले के उदाहरण भी दिए है

कमीशन ने रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के हालात दर्शाते हुए कुछ उदाहरण भी दिए हैं। इसमें बताया गया है कि मई 2019 में सिंध के मीरपुरखास के एक हिंदू वेटरिनरी सर्जन रमेश कुमार मल्ही पर कुरान के पन्नों में दवाई लपेटकर देने के लिए ईशनिंदा का आरोप लगा दिया गया था। इसके चलते प्रदर्शनकारियों ने वेटरिनरी के क्लिनिक और आसपास के हिंदुओं की दुकानें जला दी थीं।

साथ ही यह भी कहा है कि पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून का लोग अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के लिए इस्तेमाल करते हैं। ईशनिंदा कानून और उसके ऊपर बढ़ते कट्टरवाद की वजह से देश में सामाजिक सौहार्द को भारी नुकसान पहुंचा है। ईशनिंदा के संवेदनशील मामलों की वजह से धार्मिक उन्माद भड़कता है।