कभी राज करते थे हम पर, आज पछता रहे दूरियां बढ़ने से

Narendra_Modi_Theresa | तस्वीर साभार: google

यह विडंबना ही है कि जिस ब्रिटिश राज में कभी सूरज ढलता नहीं था, जिसने हमारे देश भारत पर भी करीब 200 सालों तक राज किया, आज वही ब्रिटेन वैश्विक दौड़ में पिछड़ रहा है| वहां की सरकार और वहां की संसद ये मान रही है कि अगर विकास और प्रगति की दौड़ में शामिल रहना है तो भारत का सहारा लेना पड़ेगा| क्योंकि भारत से संबंधो को मजबूत बनाए बिना और प्रबुद्ध और विलक्षण प्रतिभा के धनी भारतियों के सहयोग के बिना किसी भी वैश्विक दौड़ में आगे बढ़ना मुश्किल है|

भारत से रिश्ते सुधारने की जरुरत – ब्रिटेन की संसदीय जांच कमिटी की सिफारिश

ब्रिटेन की संसद में “फॉरेन अफेयर्स कमिटी” द्वारा भारत-ब्रिटेन संबंधों पर जारी की गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि, “ब्रिटेन की सरकार इतिहास को देखते हुए भारत से रिश्ते नहीं बना सकती| आज ब्रिटेन की जरुरत है कि वो भारत के बढ़ते हुए वैश्विक प्रभुत्व और शक्ति के मद्देनजर अपनी रणनीति तय करे|”

कथित रिपोर्ट “Building Bridges: Reawakening UK-India Ties” में एक अहम् मुद्दा माइग्रेशन का भी है| इस रिपोर्ट की खास बातें इस प्रकार है:

1. रिपोर्ट में सीधा-सीधा कहा गया है कि ब्रिटेन को भारतीय उद्यमियों, स्टार्टअप, विलक्षण तकनीकी क्षमता वाले प्रोफेशनल्स, तथा भारतीय छात्रों के लिए दरवाजे खोलने की आवश्यकता है|
2. बढती आय के कारण भारत से ब्रिटेन आने के इच्छुक पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है| इन सबके लिए ब्रिटेन आने की शर्तें और मुश्किलें कम करना अति आवश्यक है|
3. भारत से ब्रिटेन आने वाले छात्रों के लिए पढाई ख़त्म करने के बाद दी साल ठहरने देने की अनुसंशा भी इस रिपोर्ट में की गयी है|
4. चीन के लिए नियम और शर्तें भारत की अपेक्षा ज्यादा सरल है, इसे बदलने की जरुरत और भारत के साथ रिश्तों को चीन से ऊपर वरीयता देने की सिफारिश इस रिपोर्ट ने की है|

उल्लेखनीय है कि साल 1998-99 तक ब्रिटेन भारत का दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार देश था लेकिन वर्तमान समय में ब्रिटेन 17वें नंबर पर है|

रिपोर्ट ने थेरेसा सरकार को इस बात के लिए लताड़ा भी है कि जालियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पुरे होने पर ब्रिटेन को भारत से आधिकारिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए थी| इतिहास को भूलकर, उस से सबक लेकर, संवेदना के साथ दोनों देशों के बीच सम्बन्ध बेहतर करने का एक मौका थेरेसा मे सरकार ने गँवा दिया|

2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से पिछले पांच सालों में निस्संदेह भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ हुई है| अर्थव्यवस्था में सुधार, तथा सभी क्षेत्रों में प्रगति को बढ़ावा देते हुए अपनी विदेशी कुटनीतिक दक्षता से प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया है| ऐसे में अमेरिका हो या ब्रिटेन सबका भारत के सामने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से झुकना मज़बूरी भी है और समय की मांग भी|