ब्रिटेन चुनाव / पहली बार भारतीय मूल के 15 नेता चुनाव जीते

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General_Election_Result | PC - Dainik Bhaskar

ब्रिटेन के आम चुनाव में भारतीय मूल के लोगों का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। कुल 15 भारतवंशी संसदीय चुनाव जीते। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी से 7 जबकि उनकी मुख्य विरोधी लेबर पार्टी से भी इतने ही भारतीय मूल के सांसद चुने गए। एक अन्य लिबरल डेमोक्रेट पार्टी के टिकट पर विजयी रहे। शुक्रवार को घोषित चुनाव परिणामों में हाउस ऑफ कॉमन्स की कुल 650 में से कंजरवेटिव पार्टी को 365 सीटों पर जीत मिली है। यह बहुमत के आंकड़े (326) से 39 ज्यादा हैं। 1980 के बाद कंजरवेटिव पार्टी की अब तक की यह सबसे बड़ी जीत है।

भारतीय मूल के सांसदों में प्रीति पटेल, ऋषि सुनक, प्रीति कौर गिल,तनमनजीत सिंह, वीरेंद्र शर्मा और वेलेरी वैज़ शामिल हैं। ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने आसान जीत हासिल की है। प्रीती पटेल ने एसेक्स के विहटम संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की हैं। प्रीति पटेल को 32,876 वोट में से 24,082 वोट मिले हैं। जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने कहा कि ब्रेग्जिट को पूरा करना ही हमारा लक्ष्य है और हम अब उसको लेकर आगे बढ़ेंगे। पिछली बार जीत हासिल कर ब्रिटेन की पहली महिला सिख सांसद बनने का गौरव हासिल करने वाली प्रीत कौर गिल ने इस बार भी जीत हासिल की है। प्रीत कौर गिल ने बर्मिंघम एडबास्टन सीट से जीत हासिल की। वहीँ चुनाव में टेक कंपनी इन्फोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति के दामाद और कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार ऋषि सुनाक ने रिचमंड (यॉर्क्स) सीट से लेबर पार्टी के टॉम कर्कवुड को 27210 वोटों से हराया।

गौरतलब है कि ब्रिटेन में करीब 15 लाख भारतीय मूल के लोग हैं। आम चुनाव के नतीजे सामने आए तो इनकी ताकत का अहसास हुआ। हाउस ऑफ कॉमन्स में अब कुल 15 भारतवंशी सांसद होंगे। इस चुनाव में तीन भारतवंशी ऐसे हैं जो पहली बार चुनकर आए हैं। 1892 में भारतीय मूल के दादाभाई नौरोजी पहली बार सांसद बने थे। अब 127 साल बाद भारतवंशी सांसदों का आंकड़ा 15 हो गया है। जबकि पिछले चुनाव में यह आंकड़ा 12 था।

Boris_Johnson

बता दे कि बोरिस जॉनसन को हिंदू और भारतीयों का समर्थक माना जाता है। जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर भी बोरिस जॉनसन सरकार ने भारत सरकार का साथ दिया था और जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा बताया था। उससे इतर विपक्षी नेता जेरेमी कार्बिन ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत सरकार के फैसले के विरोध में प्रस्ताव पारित किया था, उन्होंने कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक तैनात करने के लिए कहा था। साथ ही कश्मीर में तनाव घटाने और भय-हिंसा को रोकने की नसीहत दी थी। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार के इस रुख के कारण ही बोरिस जॉनसन को भारतीयों का बड़े पैमाने पर चुनाव में समर्थन मिला। उनके चुनाव प्रचार में भी इस बार हिंदी गाने खूब बजाए गए थे।

 


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