UAPA बिल 2019 हुआ लोकसभा से पारित, कानून बनते ही आतंकी घोषित होंगे हाफिज सईद और मसूद अजहर

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एक तरफ जहाँ हमारी सेना और सुरक्षाबल इस देश से आतंकवादियों का नामो-निशान मिटाने के अपने मिशन को तेजी से अंजाम दे रही है वहीँ दूसरी तरफ MODI 2.0 की सरकार इन आतंकवादियों पर कानूनी तौर पर पूरी तरह से बैन लगाने की पूरी तैयारी कर रहा है | इस कोशिश में मोदी सरकार को पहली सफलता हासिल हो चुकी है |

जी हाँ भारत के आतंकविरोधी कानून में मोदी सरकार ने कुछ संशोधन किये थे जिनको लोकसभा से पारित करने के लिए प्रस्तावित किया गया था | और अच्छी बात ये है की विपक्ष द्वारा खड़ा किये सारे अडंगों के बावजूद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन (UAPA) विधेयक, 2019 लोकसभा से पारित हो चूका है और अब सरकार इसे राज्यसभा से पारित करने की तैयारिओं में जुटा हुआ है |

क्या होंगे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन (UAPA) विधेयक, 2019 के फायदे ?

सूत्रों के मुताबिक अगर UAPA बिल राज्यसभा से भी पारित हो जाता है तो भारत सरकार सबसे पहले अपना शिकंजा हाफिज सईद और मसूद अजहर पर कसेगी और इन दोनों को आतंकवादी घोषित करने की कवायद करेगी | कानून के मुताबिक जिसे आतंकवादी घोषित किया जाएगा, उस पर यात्रा प्रतिबंध लग सकेंगे और उसकी संपत्ति जब्त की जा सकेगी |

हालाँकि इस कानून के तहत जो नए नियम लागु होंगे ये तो इस बिल के पारित होने के बाद ही पता चलेगा पर गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार किसी व्यक्ति को आतंकवादी तभी घोषित किया जा सकेगा जब गृह मंत्रालय ऐसा करने की सहमति देगा | उसके साथ ही आतंकवादी घोषित किया हुआ व्यक्ति केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष अपील कर सकेगा जिस पर केंद्रीय गृह सचिव को 45 दिनों के अन्दर फैसला होगा | हालाँकि जब दोबारा सरकार अपने फैसले की पुष्टि कर लेगी तब यह संगठन अदालत में चुनौती नहीं दे सकेगा |

बता दे की इसके साथ ही एक कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा जिसमे भारत सरकार के कम से कम दो सेवानिवृत्त सचिव होंगे | एक बार आतंकवादी घोषित होने के बाद, सरकार उसकी संपत्ति को जब्त करने जैसे कदम उठा सकेगी |

कौन है ये हाफिज सईद और मसूद अजहर ?

Hafiz-masood

हाफिज सईद और मसूद अजहर इन दो नामों से शायद ही कोई ऐसा है जो परिचित न हो | इन दोनों को भारत में हुए कई आतंकवादी हमलों में शामिल पाया गया है | बता दे  हाफिज सईद साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है, जबकि मसूद अजहर साल 2001 में संसद पर हमले में मोस्ट वॉन्टेड है |

इन दोनों को ग्लोबल आतंकी घोषित किया जा चुका है पर फिर भी पाकिस्तान ने इन दोनों को शरण दिया हुआ है और इनका सरंक्षण कर रहा है |

15 साल में 42 संगठन गैरकानूनी घोषित

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार इस कानून के अंतर्गत बीते 15 सालों में 42 संगठनों को गैरकानूनी घोषित किया गया है जिनमे से सिर्फ एक ही ऐसा संगठन था जिसने सरकार के फैसले के खिलाफ अपील की है | इस संगठन का नाम था दीनदान अंजुमन |

बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष के सवालों पर अमित शाह के जवाब

Amit Shah

हर बार की तरह इस बार भी विपक्ष ने जम के इस बिल का विरोध किया और सवालों की पूरी लिस्ट सरकार के सामने रख दी पर अमित शाह ने विपक्ष के हर बेतुके सवाल का सटीक जवाब दिया | कांग्रेस के विरोध का जवाब देते हुए उन्होंने कहा की 1967 में इंदिरा गांधी की सरकार ही यह कानून लेकर आई थी फिर इतने सालों में कांग्रेस के लिए ये कानून गलत कैसे हो गया |

बातचीत से शांति बनाने की कोशिश करने वालों के बेतुक बहस का जवाब देते हुए शाह ने कहा की ऐसे लोग आतंकवादी अपने हथियार से नहीं होते है बल्कि उनकी सोच ही आतंकवादी सोच से ग्रसित होती है |

शाह के मुताबिक वर्तमान के कानून में आंतकी गतिविधि में लिप्त संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित करने का प्रावधान तो है पर वारदात को अंजाम देने वाले आतंकी को आतंकी घोषित करने का प्रावधान नहीं है | इस बात का उदहारण देते हुए कहा कि एनआईए ने यासीन भटकल की संस्था इंडियन मुजाहिदीन को आतंकवादी संस्था घोषित किया था, लेकिन उसे आतंकवादी घोषित नहीं कर पाई और इसका फायदा लेते हुए उसने 12 घटनाओं को अंजाम दिया था |

शाह ने कहा की आतंवादियों और उनके संगठन पर रोक लगाने के लिए हमें कड़े से कड़े कानून की शख्त ज़रुरत है और इसलिए हमारी सरकार ने पहले से मौजूद UAPA कानून में ज़रूरी संशोधन किये है और अब बस इसे कानून बनने की तैयारी कर रही है |

 


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