अमरीकी लोगों की नौकरी के बहाने ट्रम्प ने प्रवासीयों के प्रवेश पर लगाया रोक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बड़ा ऐलान किया है। ट्रम्प ने दूसरे देशों के लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगाने की घोषणा की है। ट्रम्प ने सोमवार देर रात ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि इस संबंध में वह जल्द ही एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत करेंगे, जिसके बाद आदेश जारी हो जाएगा।

अमेरिकियों की नौकरी बचाने का दिया हवाला

ट्रम्प ने अपने ट्वीट में कहा कि एक अदृश्य दुश्मन के हमले और हमारे महान अमेरिकियों की नौकरियों का रक्षा करने की आवश्यकता को देखते हुए मैं एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करूंगा, जिससे अमेरिका में प्रवासियों के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लग जाएगी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं दी। न तो यह बताया गया कि यह रोक कब तक जारी रहेगी और न ही इससे प्रभावित होने वाले देशों की जानकारी दी गई। साथ ही ट्रम्प ने यह भी नहीं बताया कि यह नया फैसला अमेरिका में पहले से रह रहे प्रवासियों पर भी लागू होगा या नहीं?

कई देशों के लोगों पर पहले से लगा है प्रतिबंध

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए ट्रम्प और अमेरिकी प्रशासन की ओर से कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए हैं। राष्ट्रपति ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए चीन, यूरोप, कनाडा और मैक्सिको की यात्रा पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके अलावा प्रशासन ने पिछले महीने सभी एम्बेंसी और काउंसलेट्स की ओर से दी जाने वाली रूटीन वीजा सेवाओं पर रोक लगा दी थी। अमेरिकी सिटीजनशिप एंड इमिग्ररेशन सर्विसेज विभाग पहले ही इन-पर्सन सेवाओं पर रोक लगा चुका है। हालांकि, कुछ आपातकालीन सेवाएं दी जा रही हैं।

एच-1बी वीजा वाले भी हो सकते हैं प्रभावित

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में प्रवेश पाने वाले भी प्रभावित हो सकते हैं। एच-1बी वीजा एक गैर प्रवासी वीजा है जो भारत के आईटी प्रोफेशनल के बीच काफी लोकप्रिय है। अमेरिका में एच-1बी वीजा के जरिए प्रवेश करने वाले प्रवासियों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की होती है। माना जा रहा है कि अमेरिकियों की नौकरी बचाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप एच-1बी वीजा के जरिए प्रवेश पाने वालों पर भी रोक लगा सकते हैं। अमेरिका ने हाल ही में एच-1बी वीजा के लिए आवेदन मांगे हैं। उधर, भारत की सॉफ्टवेयर और सर्विसेज कंपनियों के राष्ट्रीय संगठन नैस्कॉम भी एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर नजर बनाए हुए है।