दिल्ली के और करीब आ रहा नार्थ ईस्ट मोदी कैबिनेट में त्रिपुरा की बेटी को मिला स्थान

आजादी के 74 साल के बाद देखा जा रहा है कि नार्थ ईस्ट राज्यों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।  नार्थ ईस्ट राज्यों को लगातार विकास से ही नहीं जोड़ा जा रहा बल्कि दिल्ली से उनकी दूरी भी कम की जा रही है। इसी क्रम में त्रिपुरा की बेटी प्रतिमा भौमिक आजादी के बाद पहली मंत्री मोदी कैबिनेट में बनी है। इतना ही नहीं ऐसा परिवर्तन उस वक्त भी देखा गया जब पहली बार विधानसभा में राष्ट्रगान से कार्यवाही की शुरूआत हुई जिससे ये साफ पता चलता है कि नार्थ ईस्ट से दिल्ली की दूरियां पिछले 7 सालो में नजदीकियां में बदल गई है।

 

त्रिपुरा की बेटी प्रतिमा भौमिक को मोदी कैबिनेट में मिली जगह

52 वर्षीय प्रतिमा भौमिक नए केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह पाने वाली त्रिपुरा की पहली महिला सांसद बन गई हैं। वह ऐसा करने वाली उत्तर-पूर्वी राज्य की पहली स्थायी निवासी भी हैं, क्योंकि उन्होंने बुधवार को केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली। विज्ञान स्नातक प्रतिमा भौमिक 1991 से बीजेपी कार्यकर्ता और नेता हैं। 1998 और 2018 में, उन्होंने धनपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा के लिए लड़ाई लड़ी, दोनों बार पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार से हार गईं। भौमिक बाद में 2019 में पश्चिम त्रिपुरा लोकसभा चुनाव के लिए दौड़े और अनुभवी सांसद शंकर प्रसाद दत्ता को हराकर 3,05,689 मतों से जीत हासिल की। प्रतिमा धनपुर गांव की रहने वाली हैं और बेहद समान्य परिवार से आती है। वह एक स्कूल टीचर की बेटी है और उसके तीन भाई-बहन हैं। वह अपने पैतृक गांव सोनमुरा के बरनारायण में खेती करती थीं। उनकी मां, कानन भौमिक ने उनके गर्व की प्रशंसा की और पीएम का आभार व्यक्त किया।

जब पहली बार गाया गया त्रिपुरा विधानसभा में राष्ट्रगान

ऐसा नहीं है दिल्ली ही नार्थ ईस्ट के करीब पहुंच रहा है बल्कि नार्थ ईस्ट भी अब दिल्ली के साथ मिलकर विकास का मार्ग मजबूत कर रहा है जिसकी झलक उस वक्त देखने को मिली जब त्रिपुरा में आजादी के बाद पहली बार विधानसभा में राष्ट्रगान की धुन सुनाई दी। 23 मार्च,2018 को बीजेपी की सरकार बिप्लब देब के नेतृत्व में बनी तब आजादी के बाद वहां राष्ट्रगान गाया गया।क्योंकि इस धुन ने देश की ऐकता को और मजबूत किया और उन लोगों के मुंह में तमाचा मारा जो ये बोलते थे कि वहां बदलाव आ ही नहीं सकता था लेकिन कहते है ना की बदलाव जरूर होता है बस उसे पूरी ईमानदारी के साथ करना चाहिये जैसा कि वहां कि सरकार ने किया। राष्ट्रगान बजाने का उद्देश्य देश का आदर करना और भारत भूमि को सम्मान देने का होता है। किसी राज्य विधानसभा के अंदर राष्ट्रगान बजाने का भी यही उद्देश्य होता है। जो अब त्रिपुरा में भी देखने को मिलने लगा है जो हम सब के लिये किसी गर्व से कम नहीं है।

सबका का साथ सबका विश्वास के फार्मूले पर चलने वाली इस सरकार ने आखिर ये दिखा ही दिया कि वो भारतीय संस्क़ति को एक तरफ मजबूत कर रहे है तो दूसरी तरफ भारत के हर राज्य को दिल्ली के करीब ला रहे है फिर वो छोटे से छोटा राज्य हो या फिर बड़े से बड़ा राज्य क्यों ना हो।