तलाक, तलाक, तलाक … हुई बीते वक़्त की बात

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बीते मंगलवार को सरकार द्वारा राज्यसभा में तीन तलाक बिल पारित करने के लिए प्रस्ताव रखा गया और वोटिंग प्रक्रिया में सरकार को सफलता मिली, साथ ही ये बिल राज्यसभा से भी पारित हो गया| यानि अब मुस्लिम समाज की महिलाओ के जीवन से तीन तलाक नाम का डर जल्द ही ख़त्म हो जायेगा| लोकसभा से तीन तलाक बिल बीते 25 जुलाई को पारित हो गया था|

लोकसभा से पारित होने के बाद से ही लोग ये अनुमान लगाना शुरू कर चुके थे कि इस बिल को राज्यसभा से पारित करवाने के लिए सरकार को काफी मसक्कत करनी पड़ेगी| ऐसा इसीलिए क्योंकि लोकसभा में NDA बहुमत में है वहीँ राज्यसभा में NDA के सांसदों की संख्या कम है| इससे पहले भी साल 2017 में सरकार इस बिल को लोकसभा से पारित करवाने में कामयाब हो गयी थी पर राज्यसभा में इस बिल को नकार दिया गया था|

इस बार भी बिल को राज्यसभा से पारित करवाना आसान नहीं था, क्योंकि अडचने बहुत थी| कई पार्टी ऐसे थे जो इस बिल के पक्ष में नहीं थे, यहाँ तक की बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन वाली पार्टी JDU भी इस बिल के खिलाफ थी| रोचक बात ये रही की इतनी अटकने और अडचनों के बाद भी सरकार इस बिल को राज्सेयसभा में पारित करवाने में कामयाब रही| वोटिंग के दौरान तीन तलाक बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े, वहीँ दूसरी तरफ 84 सांसदों ने इस बिल का विरोध किया| अहम् बात ये रही की बीएसपी, पीडीपी, टीआरएस, जेडीयू, एआईएडीएमके और टीडीपी जैसे कई बड़े पार्टियों के वोटिंग में हिस्सा न लेने के चलते सरकार को यह बिल पास कराने में आसानी हुई|

राज्यसभा में बिल पारित होने के बाद ये राष्ट्रपति के पास उनकी मंजूरी के लिए जायेगा, और मंजूरी मिलते ही तीन तलाक से जुड़ा ये विधेयक कानून बन जायेगा और मौजूदा अध्यादेश की जगह ले लेगा|

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक बार फिर विपक्षों के उठाये बेतुके सवालों का सटीक जवाब दिया| उन्होंने कहा कि इस से पहले कांग्रेस की सरकार हिन्दू मैरिज एक्ट में ज़रूरी संशोधन कर चुकी है, जिनमे दहेज़ से सम्बंधित और शादी की उम्र निश्चित करने जैसे कानून लाये गए जो आज पुरे देश में मान्य हैं, फिर इस बिल का विरोध क्यों किया जा रहा है, सिर्फ इसलिए क्योंकि ये दुसरे धर्म का है|

कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा की हिन्दू महिलाओ के हित के लिए हिन्दू मैरिज एक्ट में संशोधन और जब 1986 में शाहबानो ने न्याय की मांग की तो क्यों कांग्रेस ने मुह फेर लिए| इतना ही नहीं 1986 में शाहबानो से लेकर 2019 में सायराबानो तक कांग्रेस आज भी अपना मुह फेर कर ही खड़ी है|

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इस बिल से मुस्लिम महिलाओ को क्या फायदे मिलेंगे

सूत्रों के अनुसार इस बिल के कानून में परिवर्तित होने के साथ ही नियमों का पालन भी शुरू कर दिया जायेगा| जिसके अंतर्गत तुरंत तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को गैर कानूनी करार दिया जायेगा और इसके साथ ही इसे संज्ञेय अपराध मानने का प्रावधान भी है| यानी पुलिस बिना वारंट के आरोपी को गिरफ़्तार कर सकती है| तलाक-ए-बिद्दत के लिए दोषी पाए गए अपराधी को तीन साल की सजा का प्रावधान रखा गया है| महिला पक्ष की बातों को सुनकर मजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत भी दे सकता है| इसके साथ ही पीडिता अगर समझौते की मांग करती है तो उसे अनुमति दी जाएगी और साथ ही पीडिता अपने गुज़ारा भत्ते की मांग भी कर सकती है|


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